आप बुरी तरह फंस चुके हैं. संजय सिंह के अलावा आपने जिन दो लोगों को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है, उससे आपकी कलई पूरी तरह खुल गई है. इनमें से एक गुप्ता जी शिक्षा व्यवसाय में एक बड़ा नाम हैं. एक बड़ा इंटरनेशनल स्कूल चलाते हैं. अभी 28 नवम्बर को उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिया है.
आपने तो पढ़ा होगा अरविन्द जी. गुप्ता जी के राज्यसभा उम्मीदवार बनने पर उनके पुराने नेता और दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष श्री अजय माकन ने किस तरह ट्वीट करते हुए चुटकी ली है. न पढ़ा हो तो सुनिए, माकन जी ने लिखा है कि 28 नवम्बर को सुशील गुप्ता कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने उनके पास आए. माकन ने उनसे अचानक इस्तीफे का कारण पूछा तो उन्होंने कहा' सर, मुझे राज्य सभा भेजने का वायदा किया है. इस पर माकन ने मुस्कुराते हुए बोले कि यह असंभव है. 'सर आप नहीं जानते' यह कहकर जवाब में सुशील गुप्ता भी मुस्कुराए. इस वाकए के बारे में बताते हुए अपने ट्वीट में एक बार फिर माकन ने चुटकी ली और कहा की' वैसे गुप्ता एक भले आदमी है, और अपने दान के लिए जाने जाते हैं.
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यह तो रहे एक गुप्ता जी. दूसरे गुप्ता जी भी शायद ऐसे ही निकलें. रहे तीसरे संजय भाई. उन्होंने फिर भी आपके और आपकी पार्टी के लिए बहुत कुछ किया है. बेचारे! पहले दिन से आपके किये का पाप खुद पर लेते रहे हैं. लोग पता नहीं क्यों उन्हें वैसे ही आपका इ (क)लेक्शन एजेंट बताते हैं.
अरविन्द भाई, माकन साहब ने न जाने क्यों अपने ट्वीट के आखिर में यह लिखा कि सुशील गुप्ता अपने दान के लिए जाने जाते हैं. अब यह आप ही जानें अरविन्द जी कि गुप्ता ने आपको क्या दान दिया है, लेकिन इस गुप्त (गुप्ता) प्रकरण से आप बुरी तरह बेनकाब हो गए हैं. और हाँ, बराए मेहरबानी इस राज्यसभा प्रकरण को सिर्फ कुमार विश्वास से न जोड़िये, आम पार्टी ( मेरे कुछ दोस्त इसे आम पार्टी ही कहते हैं. आखिरकार यह किसी भी दूसरी पार्टी की तरह ही तो है) के तमाम अच्छे और सच्चे कार्यकर्ता बुरी तरह से निराश हैं.
और तो और, आपके वे पुराने साथी भी गहरी शर्मिंदगी में हैं, जिन्हें गाली देते हुए आपने धकियाकर अपनी AAP यानी अरविन्द एंड एसोसिएट्स पार्टी से बाहर निकाल दिया था, और जो अब आप और आपकी पार्टी से कोई मतलब नहीं रखना चाहते.
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आज की राजनीति में सच और संतुलन के प्रतीक और आपके पुराने साथी प्रो. योगेन्द्र यादव ने तो निराशा भरा ट्वीट भी किया है: मैं कहता था कि अरविन्द में और चाहे जो कमियाँ हों, उन्हें खरीदा नहीं जा सकता. कपिल मिश्रा द्वारा उन पर आरोप लगाए जाने पर भी मैंने बचाव किया. लेकिन आज मैं समझ नहीं पा रहा कि क्या कहूं. मैं अवाक हूँ. शर्मिन्दा हूँ. सन्न हूँ.
अरविन्द जी, आज सिर्फ प्रो. योगेन्द्र यादव ही नहीं वे तमाम लोग शर्मिन्दा हैं, जो अपना घर-बार, कैरियर दांव पर लगाकर पहले आन्दोलन से और फिर आपकी पार्टी से जुड़ गए थे. आपने बहुत निराश किया है अरविन्द जी. आप करोड़ों भारतीयों द्वारा देखे गए इस साझे, विराट और पवित्र स्वप्न को भंग करने के एकमात्र दोषी हैं. ईश्वर आपको सद्बुद्धि दे.
आपका शुभचिंतक,
राजीव ध्यानी
