-उमाशंकर सिंह
इस फोटो में पता नहीं ऐसा क्या है कि लोग बिफर पड़े हैं। इस एक फोटो के आधार पर आईएएस जगदीश सोनकर का पूरा चरित्र, इतिहास, स्वभाव उसका सामंतीपना सब खंगाल लिया गया है। इतना ही नहीं लोग उसकी जाति पर पहुंच गए हैं। आईएएस की ट्रेनिंग में बेसिक खामी तक को इसका जिम्मेदार बता दिया।
यह सब उसी भीड़वादी मानसिकता के तहत किया जा रहा है जिसका हम सब विरोध करते हैं और अचानक खुद वैसा ही कृत्य करने लग जाते हैं। हो सकता है। एक मिनट को उसका पैर दर्द कर रहा हो और उसने बेड के हत्थे पर टिका दिया हो। और फोटो क्लिक किए जाने के तुरंत बाद उसे हटा लिया हो! उसने अपने जूते वाला पैर बेड पर तो नहीं रखा है! अच्छा उसके आसपास के जो लोग हैं वह सहज होके बैठे हैं। सहज होके मुस्कुराते हुए बातें कर रहे हैं। कोई अपने कलेक्टर के सामने इतना सहज रहता है क्या??
एक आईएएस के इर्द-गिर्द जो अमला रहता है वह भी इस फोटो से नदारद है। अच्छा एसडीएम सोनकर अपने जिले के एक अस्पताल के औचक दौरे पर हैं। आपने पिछली बार किसी आईएएस-आईपीएस का बिना किसी दुर्घटना के अस्पताल जाकर निरीक्षण करने के बारे में कब सुना-देखा है?? हो सकता है सोनकर के बारे में जो सब कहा जा रहा है वो सब सही हो। हो सकता है नहीं हो। पर हम क्यों एक फोटो पर लोगों को इस तरह जज करने लगते हैं।
ऐसे ही एक फोटो के आधार पर कुछ दिन पहले लोग कन्हैया का चरित्रहनन कर रहे थे। एक छोटा सा अपना वाकया सुनाता हूं। मैं डीयू से एमए कर रहा था। मेरा पैर अचानक सो गया। मैंने उसे डेस्क पर टिका दिया। अभी मैंने रखा ही था कि टीचर जी आ गए और उनने मुझे बदतमीज, अनुशासनहीन और क्या-क्या नहीं साबित कर दिया। मैंने उन्हें बताना चाहे कि असल में मेरा पैर सो गया था। उनने सुनना ही जरूरी नहीं समझा और फैसले पर पहुंच गए। क्या आप भी डीयू के उस चिरकूट मास्टर की तरह सोचने लगे हैं??
एक टिप्पणी:
एक छोटा सा बच्चा अपने दोनों हाथों में एक एक एप्पल लेकर खड़ा था
उसके पापा ने मुस्कराते हुए कहा कि
"बेटा एक एप्पल मुझे दे दो"
इतना सुनते ही उस बच्चे ने एक एप्पल को दांतो से कुतर लिया.
उसके पापा कुछ बोल पाते उसके पहले ही उसने अपने दूसरे एप्पल को भी दांतों से कुतर लिया
अपने छोटे से बेटे की इस हरकत को देखकर बाप ठगा सा रह गया और उसके चेहरे पर मुस्कान गायब हो गई थी...
तभी उसके बेटे ने अपने नन्हे हाथ आगे की ओर बढाते हुए पापा को कहा....
"पापा ये लो.. ये वाला ज्यादा मीठा है.
शायद हम कभी कभी पूरी बात जाने बिना निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं.
.
किसी ने क्या खूब लिखा है:
नजर का आपरेशन तो सम्भव है,
पर नजरिये का नही..!
इस फोटो में पता नहीं ऐसा क्या है कि लोग बिफर पड़े हैं। इस एक फोटो के आधार पर आईएएस जगदीश सोनकर का पूरा चरित्र, इतिहास, स्वभाव उसका सामंतीपना सब खंगाल लिया गया है। इतना ही नहीं लोग उसकी जाति पर पहुंच गए हैं। आईएएस की ट्रेनिंग में बेसिक खामी तक को इसका जिम्मेदार बता दिया।
यह सब उसी भीड़वादी मानसिकता के तहत किया जा रहा है जिसका हम सब विरोध करते हैं और अचानक खुद वैसा ही कृत्य करने लग जाते हैं। हो सकता है। एक मिनट को उसका पैर दर्द कर रहा हो और उसने बेड के हत्थे पर टिका दिया हो। और फोटो क्लिक किए जाने के तुरंत बाद उसे हटा लिया हो! उसने अपने जूते वाला पैर बेड पर तो नहीं रखा है! अच्छा उसके आसपास के जो लोग हैं वह सहज होके बैठे हैं। सहज होके मुस्कुराते हुए बातें कर रहे हैं। कोई अपने कलेक्टर के सामने इतना सहज रहता है क्या?? एक आईएएस के इर्द-गिर्द जो अमला रहता है वह भी इस फोटो से नदारद है। अच्छा एसडीएम सोनकर अपने जिले के एक अस्पताल के औचक दौरे पर हैं। आपने पिछली बार किसी आईएएस-आईपीएस का बिना किसी दुर्घटना के अस्पताल जाकर निरीक्षण करने के बारे में कब सुना-देखा है?? हो सकता है सोनकर के बारे में जो सब कहा जा रहा है वो सब सही हो। हो सकता है नहीं हो। पर हम क्यों एक फोटो पर लोगों को इस तरह जज करने लगते हैं।
ऐसे ही एक फोटो के आधार पर कुछ दिन पहले लोग कन्हैया का चरित्रहनन कर रहे थे। एक छोटा सा अपना वाकया सुनाता हूं। मैं डीयू से एमए कर रहा था। मेरा पैर अचानक सो गया। मैंने उसे डेस्क पर टिका दिया। अभी मैंने रखा ही था कि टीचर जी आ गए और उनने मुझे बदतमीज, अनुशासनहीन और क्या-क्या नहीं साबित कर दिया। मैंने उन्हें बताना चाहे कि असल में मेरा पैर सो गया था। उनने सुनना ही जरूरी नहीं समझा और फैसले पर पहुंच गए। क्या आप भी डीयू के उस चिरकूट मास्टर की तरह सोचने लगे हैं??
एक टिप्पणी:
एक छोटा सा बच्चा अपने दोनों हाथों में एक एक एप्पल लेकर खड़ा था
उसके पापा ने मुस्कराते हुए कहा कि
"बेटा एक एप्पल मुझे दे दो"
इतना सुनते ही उस बच्चे ने एक एप्पल को दांतो से कुतर लिया.
उसके पापा कुछ बोल पाते उसके पहले ही उसने अपने दूसरे एप्पल को भी दांतों से कुतर लिया
अपने छोटे से बेटे की इस हरकत को देखकर बाप ठगा सा रह गया और उसके चेहरे पर मुस्कान गायब हो गई थी...
तभी उसके बेटे ने अपने नन्हे हाथ आगे की ओर बढाते हुए पापा को कहा....
"पापा ये लो.. ये वाला ज्यादा मीठा है.
शायद हम कभी कभी पूरी बात जाने बिना निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं.
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किसी ने क्या खूब लिखा है:
नजर का आपरेशन तो सम्भव है,
पर नजरिये का नही..!
