प्रिय नव्या और अाराध्या,
तुम दोनों के नाजुक कंधों पर बेहद अहम विरासत की जिम्मेदारी है। तुम दोनों के परदादा एचपी नंदा ने तुम्हें मौजूदा सरनेम दिया है, ताकि तुम लोग इस प्रतिष्ठा, उपाधि और सम्मान को सेलिब्रेट कर सको। तुम दोनों भले ही नंदा या बच्चन हो, लेकिन तुम दोनों लड़की हो महिला हो और चूंकि तुमलोग महिला हो इसलिए लोग अपनी सोच, अपना दायरा तुम पर थोपने की कोशिश करेंगे। वे तुमसे कहेंगे कि तुम्हें कैसे कपड़े पहनने चाहिए, कैसा व्यवहार करना चाहिए, किससे मिलना है और कहां जाना है।
लोगों की बातों को अपने ऊपर हावी मत होने देना। अपने दिमाग से अपनी च्वॉइस खुद तय करना। किसी को यह तय करने का मौका मत देना कि तुम्हारी स्कर्ट की लंबाई तुम्हारे कैरेक्टर का पैमाना है। किसी को यह सलाह देने की इजाजत भी मत देना कि तुम्हारे फ्रेंड्स कौन और कैसे होने चाहिए। तुम्हें किन लोगों से दोस्ती रखनी चाहिए, किनसे नहीं। किसी और वजह से शादी करने की जरूरत नहीं, जब तक कि तुम खुद शादी के लिए तैयार न हो। लोग बातें करेंगे। बेवजह की बातें करेंगे, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि तुम्हें उनकी बातें सुननी ही हैं। इन बातों से कभी भी परेशान मत होना कि लोग क्या कहेंगे?

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किम कार्दशियन कुछ भी पहनें तो पहले ऋषि कपूर से कन्फर्म कर लें कि वो तो ठीक है न?
आखिरकार सिर्फ तुम दोनों ही ऐसी हो, जिन्हें अपने किसी भी काम का नतीजा झेलना पड़ेगा, इसलिए किसी दूसरे को तुम्हारे लिए फैसला लेने का हक मत देना। नव्या- तुम्हारा नाम, तुम्हारे सरनेम की खासियत तुम्हारी उन मुश्किलों से नहीं बचाएगी, जो महिला होने की वजह से तुम्हारे सामने आएंगी। आराध्या- समय के साथ तुम इन चीजों को समझोगी। हो सकता है कि तब मैं तुम्हारे आसपास न रहूं, लेकिन मुझे लगता है कि जो कुछ आज मैं कह रहा हूं उस वक्त भी तुम्हारे लिए उचित रहेगा।
यह मुश्किल हो सकता है, एक महिला के लिए यह दुनिया मुश्किल हो सकती है, लेकिन मेरा यकीन है कि तु्म्हारी जैसी महिलाएं इन चीजों को बदल सकती हैं। अपनी सीमाएं खींच पाना, अपनी पसंद रखना, दूसरों को फैसले से ऊपर उठकर सोचना भले ही आसान न हो, लेकिन तुम हर जगह महिलाओं के लिए एक उदाहरण बन सकती हो। ऐसा ही करना और जितना मैंने अब तक किया है तुम लोग उससे कहीं ज्यादा करोगी और मेरे लिए सम्मान की बात होगी कि मैं अमिताभ बच्चन के नाम से नहीं, बल्कि तुम्हारे दादा और नाना के रूप में जाना जाऊं।
प्यार सहित
तुम्हारे दादा...तुम्हारे नाना
[अगर आप भी लिखना चाहते हैं कोई ऐसी चिट्ठी, जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो हमें लिख भेजें- merekhatt@gmail.com. हमसे फेसबुक, ट्विटर और गूगलप्लस पर भी जुड़ें]
तुम दोनों के नाजुक कंधों पर बेहद अहम विरासत की जिम्मेदारी है। तुम दोनों के परदादा एचपी नंदा ने तुम्हें मौजूदा सरनेम दिया है, ताकि तुम लोग इस प्रतिष्ठा, उपाधि और सम्मान को सेलिब्रेट कर सको। तुम दोनों भले ही नंदा या बच्चन हो, लेकिन तुम दोनों लड़की हो महिला हो और चूंकि तुमलोग महिला हो इसलिए लोग अपनी सोच, अपना दायरा तुम पर थोपने की कोशिश करेंगे। वे तुमसे कहेंगे कि तुम्हें कैसे कपड़े पहनने चाहिए, कैसा व्यवहार करना चाहिए, किससे मिलना है और कहां जाना है।
लोगों की बातों को अपने ऊपर हावी मत होने देना। अपने दिमाग से अपनी च्वॉइस खुद तय करना। किसी को यह तय करने का मौका मत देना कि तुम्हारी स्कर्ट की लंबाई तुम्हारे कैरेक्टर का पैमाना है। किसी को यह सलाह देने की इजाजत भी मत देना कि तुम्हारे फ्रेंड्स कौन और कैसे होने चाहिए। तुम्हें किन लोगों से दोस्ती रखनी चाहिए, किनसे नहीं। किसी और वजह से शादी करने की जरूरत नहीं, जब तक कि तुम खुद शादी के लिए तैयार न हो। लोग बातें करेंगे। बेवजह की बातें करेंगे, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि तुम्हें उनकी बातें सुननी ही हैं। इन बातों से कभी भी परेशान मत होना कि लोग क्या कहेंगे?

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यह मुश्किल हो सकता है, एक महिला के लिए यह दुनिया मुश्किल हो सकती है, लेकिन मेरा यकीन है कि तु्म्हारी जैसी महिलाएं इन चीजों को बदल सकती हैं। अपनी सीमाएं खींच पाना, अपनी पसंद रखना, दूसरों को फैसले से ऊपर उठकर सोचना भले ही आसान न हो, लेकिन तुम हर जगह महिलाओं के लिए एक उदाहरण बन सकती हो। ऐसा ही करना और जितना मैंने अब तक किया है तुम लोग उससे कहीं ज्यादा करोगी और मेरे लिए सम्मान की बात होगी कि मैं अमिताभ बच्चन के नाम से नहीं, बल्कि तुम्हारे दादा और नाना के रूप में जाना जाऊं।
प्यार सहित
तुम्हारे दादा...तुम्हारे नाना
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