दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जेएनयू प्रकरण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में जेएनयू से जुड़े मसले, दिल्ली पुलिस की भूमिका और विधायक ओपी शर्मा की ओर से पटियाला हाउस कोर्ट में एक युवक से की गई मारपीट का मुद्दा उठाया है। केजरीवाल ने जेएनयू पर पीएम से चुप्पी तोड़ने की गुजारिश की है।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में जो घटनाएं घटी हैं, उन्हें लेकर मैं बहुत चिंतित हूं। इसलिए आपको यह पत्र लिख रहा हूं।
ऎसा कहा जा रहा है कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ लोगों ने भारत विरोधी नारे लगाये। भारत में ही रहकर यदि कोई भारत विरोधी गतिविधियां करे तो इसे कदाचित बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। इस पर पूरा देश एकमत है। लेकिन इस घटना की आड़ में निर्दोष लोगों को गिरफ्तार करना, उन्हें प्रताड़ित करना और फिर राष्ट्र भक्ति को खौफ में बदलकर संवैधानिक संस्थाओं को अपने इशारे पर चलाना, यह ठीक नहीं है।
उस घटना को बहाना बनाकर पूरे जेएनयू को आतंकवादियों के अड्डे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यह बहुत खतरनाक है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जेएनयू और उसके विद्यार्थियों ने नाम कमाया है। ऎसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय को आतंकवादियों के अड्डे के रूप में प्रस्तुत करना बहुत ही गलत होगा।
कल पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में जो कुछ हुआ, वह भी बहुत विचलित करने वाला है। कोर्ट परिसर में कुछ लोगों ने शिक्षकों, विद्यार्थियों और पत्रकारों को बुरी तरह से पीटा। पुलिस खड़ी देखती रही, पुलिस ने कुछ नहीं किया। अगर कोर्ट परिसर के अंदर यह सब कुछ हो सकता है तो फिर कौन सी जगह सुरक्षित रह जाती है? आज सभी अखबारों के पहले पन्ने पर बीजेपी विधायक श्री ओपी शर्मा द्वारा एक लड़के को मारने की तस्वीर छपी है और यह बयान भी छपा है कि बंदूक होती तो गोली मार देता। यह तो सिस्टम को फेल करने वाले हालात हैं। यह सही नहीं है।
इस किस्म की घटनाओं को अगर तुरंत सख्ती के साथ नहीं रोका गया तो मुझे डर है, कहीं देर न हो जाए।
मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि तुरंत निम्नलिखित कदम उठाये जाएं-
1- श्री ओपी शर्मा जैसे उपद्रवी और अराजक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कर यह संदेश दिया जाए कि सरकार इस किस्म की अराजकता बर्दाश्त नहीं करेगी। श्री ओपी शर्मा भाजपा के विधायक हैं। भाजपा को भी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। मेरा तो मानना है कि यदि आप एक बार ओपी शर्मा को बुलाकर डांट भी देंगे तो वे भविष्य में ऎसी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं करेंगे। नहीं तो ओपी शर्मा जैसे तत्वों को लगता है कि उन्हें केंद्र सरकार का पूरा समर्थन है। उनकी इस धारणा को तोड़ना होगा। मेरा तो मानना है कि कानून को हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं होनी चाहिए और अगर संविधान की शपथ लेकर जनता के नुमाइंदे ही कानून को हाथ में लेने लगेंगे तो फिर घोर संकट पैदा होगा।
2- जेएनयू कांड में निर्दोष लोगों को तुरंत छोड़ा जाए, असली दोषियों को चिन्हित किया जाए और दोषियों को पकड़कर सख्त सजा दिलवायी जाए।
3- जेएनयू और अन्य शिक्षण संस्थानों में राजनैतिक दखलांदाजी बंद हो, शिक्षण संस्थानों को शिक्षाविदों पर छोड़ दिया जाए।
4- दिल्ली का पुलिस-प्रशासन केंद्र सरकार के हाथ में है और जेएनयू मामले में वही फेल नजर आ रहा है। आप सख्त निर्देश दें ताकि लोगों का भरोसा पुलिस पर कायम हो।
देश विरोधी ताकतों के खिलाफ पूरा देश एक है। पर क्या भाजपा विरोध करने वाला हर छात्र राष्ट्र विरोधी है? नहीं।
मेरा आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है कि तेजी से फैलती इस आग को तुरंत रोकिए। लोग आपके हस्तक्षेप की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं। कृपया अपनी चुप्पी तोड़िये। यदि आप उक्त सभी कदम उठायें तो मुझे पूरा यकीन है कि आपके इन कदमों की सारा देश सराहना करेगा और सभी पार्टियां इसमें आपका साथ देंगी।
सादर
अरविंद केजरीवाल
तारीख- 16 फरवरी, 2016
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| photo courtesy: khabar.ibnlive |
आदरणीय प्रधानमंत्री जी
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में जो घटनाएं घटी हैं, उन्हें लेकर मैं बहुत चिंतित हूं। इसलिए आपको यह पत्र लिख रहा हूं।
ऎसा कहा जा रहा है कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ लोगों ने भारत विरोधी नारे लगाये। भारत में ही रहकर यदि कोई भारत विरोधी गतिविधियां करे तो इसे कदाचित बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। इस पर पूरा देश एकमत है। लेकिन इस घटना की आड़ में निर्दोष लोगों को गिरफ्तार करना, उन्हें प्रताड़ित करना और फिर राष्ट्र भक्ति को खौफ में बदलकर संवैधानिक संस्थाओं को अपने इशारे पर चलाना, यह ठीक नहीं है।
उस घटना को बहाना बनाकर पूरे जेएनयू को आतंकवादियों के अड्डे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यह बहुत खतरनाक है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जेएनयू और उसके विद्यार्थियों ने नाम कमाया है। ऎसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय को आतंकवादियों के अड्डे के रूप में प्रस्तुत करना बहुत ही गलत होगा।
कल पटियाला हाउस कोर्ट परिसर में जो कुछ हुआ, वह भी बहुत विचलित करने वाला है। कोर्ट परिसर में कुछ लोगों ने शिक्षकों, विद्यार्थियों और पत्रकारों को बुरी तरह से पीटा। पुलिस खड़ी देखती रही, पुलिस ने कुछ नहीं किया। अगर कोर्ट परिसर के अंदर यह सब कुछ हो सकता है तो फिर कौन सी जगह सुरक्षित रह जाती है? आज सभी अखबारों के पहले पन्ने पर बीजेपी विधायक श्री ओपी शर्मा द्वारा एक लड़के को मारने की तस्वीर छपी है और यह बयान भी छपा है कि बंदूक होती तो गोली मार देता। यह तो सिस्टम को फेल करने वाले हालात हैं। यह सही नहीं है।
इस किस्म की घटनाओं को अगर तुरंत सख्ती के साथ नहीं रोका गया तो मुझे डर है, कहीं देर न हो जाए।
मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि तुरंत निम्नलिखित कदम उठाये जाएं-
1- श्री ओपी शर्मा जैसे उपद्रवी और अराजक तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई कर यह संदेश दिया जाए कि सरकार इस किस्म की अराजकता बर्दाश्त नहीं करेगी। श्री ओपी शर्मा भाजपा के विधायक हैं। भाजपा को भी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। मेरा तो मानना है कि यदि आप एक बार ओपी शर्मा को बुलाकर डांट भी देंगे तो वे भविष्य में ऎसी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं करेंगे। नहीं तो ओपी शर्मा जैसे तत्वों को लगता है कि उन्हें केंद्र सरकार का पूरा समर्थन है। उनकी इस धारणा को तोड़ना होगा। मेरा तो मानना है कि कानून को हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं होनी चाहिए और अगर संविधान की शपथ लेकर जनता के नुमाइंदे ही कानून को हाथ में लेने लगेंगे तो फिर घोर संकट पैदा होगा।
2- जेएनयू कांड में निर्दोष लोगों को तुरंत छोड़ा जाए, असली दोषियों को चिन्हित किया जाए और दोषियों को पकड़कर सख्त सजा दिलवायी जाए।
3- जेएनयू और अन्य शिक्षण संस्थानों में राजनैतिक दखलांदाजी बंद हो, शिक्षण संस्थानों को शिक्षाविदों पर छोड़ दिया जाए।
4- दिल्ली का पुलिस-प्रशासन केंद्र सरकार के हाथ में है और जेएनयू मामले में वही फेल नजर आ रहा है। आप सख्त निर्देश दें ताकि लोगों का भरोसा पुलिस पर कायम हो।
देश विरोधी ताकतों के खिलाफ पूरा देश एक है। पर क्या भाजपा विरोध करने वाला हर छात्र राष्ट्र विरोधी है? नहीं।
मेरा आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है कि तेजी से फैलती इस आग को तुरंत रोकिए। लोग आपके हस्तक्षेप की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं। कृपया अपनी चुप्पी तोड़िये। यदि आप उक्त सभी कदम उठायें तो मुझे पूरा यकीन है कि आपके इन कदमों की सारा देश सराहना करेगा और सभी पार्टियां इसमें आपका साथ देंगी।
सादर
अरविंद केजरीवाल
तारीख- 16 फरवरी, 2016
