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राष्ट्रवादी की चिट्ठी: 'गुरुग्राम' का मजाक उड़ाने वाले देशद्रोही हैं


- रवींद्र रंजन 


दो दिन से देख रहा हूं सोशल मीडिया पर कुछ लोग गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम करने का मजाक उड़ा रहे हैं। तरह-तरह की बातें बना रहे हैं। चुटकुले गढ़ रहे हैं। असल में ये सब देशद्रोही किस्म के लोग हैं। इन सबको देश में रहने का कोई हक नहीं है। इन्हें पाकिस्तान भेज देना चाहिए। अपनी जड़ों की ओर लौटने की दिशा में  हरियाणा सरकार के इस छोटे से कदम की जितनी तारीफ की जाए, कम है।

नाम बदलने का विरोध कर रहे और अपने ही शहर का मजाक उड़ा रहे लोग इस देश की गौरवशाली संस्कृति और सभ्यता के दुश्मन हैं। मेरा वश चले तो ऐसे लोगों को सरेआम फांसी पर लटका दूं। खुद तो कोई अच्छा काम करते नहीं, दूसरों को भी नहीं करने देते। हरियाणा सरकार का एक बेहतरीन फैसला इन देशद्रोहियों के गले नहीं उतर रहा है। मनोहर लाल खट्टर की देशभक्त और राष्ट्रवादी सरकार कुछ अच्छा काम कर रही है, तो देश विरोधियों से बर्दाश्त नहीं हो रहा है। वैसे भी जब से केंद्र में राष्ट्रभक्त मोदी सरकार आई है, तब से देशद्रोही किस्म के लोग ऐसी ही हरकतें कर रहे हैं। इन्हें देश का गौरव बढ़ाने वाले फैसले की तारीफ़ करनी चाहिए, उल्टा उसमें मीन-मेख निकाल रहे हैं।

गुरुग्राम में अपनेपन की जो भावना है, वो भला गुड़गांव में कहांदेख लेना, अब गुरुगांव जाते वक्त दिल में ऐसी फीलिंग आएगी जैसे हाईटेक सिटी नहीं, गुरुकुल जा रहे हों। साइबर सिटी नहीं किसी सिद्ध बाबा 1008 के आश्रम जा रहे हों। बस इस सरकार की यही बात तो तारीफ़ के काबिल है। भारत को दोबारा विश्वगुरु बनाना है तो यह सब तो करना ही होगा। कायदे से तो हर शहर का नाम बदला जाना चाहिए। कितना आध्यात्मिक टाइप का लगता है गुरुग्राम सुनकर, जैसे कोई पब, हुक्का- बार और डिस्कोथेक से गुलजार शहर  गुड़गांव की नहीं, बल्कि बाबा रामदेव या श्री श्री रविशंकर के शुद्ध देसी आश्रम की बात कर रहा हो। सच्ची, नाम सुनकर ही दिल को कितना सुकून मिलता है। गुरुग्राम ईश्वर के नजदीक ले जाता है और गुड़गांव पश्चिमी सभ्यता का प्रतीक लगता है, जहां लड़कियां दारू पीकर रात-रात भर बाहर घूमती रहती हैं।  

कुछ फेसबुकिये और ट्विटरिये शेक्सपियर का हवाला देकर पूछ रहे हैं कि नाम में क्या रखा है? नाम बदलकर क्या होगागुड़गांव को गुरुग्राम करने से वह शंघाई बन जाएगा? ऐसे सवाल,  दरअसल उनकी जलन का नतीजा हैं। उन्हें स्वदेशी की कोई समझ ही नहीं है। पश्चिम का कोई भी शख्स कुछ भी कह दे, ये उसी को आंख मूंदकर बेहतर मान लेते हैं। आखिर वो टुच्चा सा लेखक शेक्सपियर भी था तो विदेशी ही। भला वह ऐसी बात कैसे लिख सकता था, जो हिंदुस्तान की राष्ट्रभक्त सरकार के किसी फैसले को सही बता सके। उसने पहले से ही किसी ज्योतिषी से जान लिया होगा कि 21वीं सदी के दौरान भारत में एक राष्ट्रभक्त सरकार आएगी, जो विश्वगुरु भारत को उसका पुराना नाम और पहचान लौटाएगी। बस इसलिए जलन के मारे लिखकर चला गया कि नाम में क्या रखा है!   

जलने वाले जलते रहें। वैसे मैं बता दूं कि विश्वगुरु बनने की दिशा में गुरुग्राम तो एक बेहद छोटा सा कदम है। अभी तो सिर्फ एक शहर का नाम बदला है। अभी तो कई शहर, कई तहसीलें, कई गांव और कई राज्य बाकी हैं। देश बाकी है। हमें तो उस दिन का इंतजार है, जब भारत देश का नाम बदलकर हिंदू राष्ट्र होगा। तिरंगे झंडे की जगह भगवा झंडा होगा। संविधान की जगह मनुस्मृति होगी। राष्ट्रपति भवन की जगह आरएसएस हेडक्वॉर्टर होगा। उस भवन में राष्ट्रपति की जगह सरसंघचालक विराजमान होंगे।  

हमारे सपनों के ऐसे हिंदू राष्ट्र में सिर्फ हिंदुओं को ही रहने का हक होगा। बाकी सब अ-हिंदुओं को हम देश से बाहर खदेड़ देंगे। पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि दुश्मन देशों में भेज देंगे। हमे पक्का यकीन है कि नरेंदर भाई मोदी की राष्ट्रवादी सरकार हमारे इस सपने को जरूर पूरी करेगी। हालांकि हमें पता है कि यह कोई आसान काम नहीं है। जल्दी संभव भी नहीं है। राज्यसभा में मोदी सरकार अल्पमत में है। इसलिएमनुस्मृति को अभी संविधान का दर्जा देने में काफी दिक्कतें हैं। लेकिन देखते जाइये अरुणाचल प्रदेश  और उत्तराखंड की तरह जहां-जहां भी देश विरोधी दलों की सरकार है, मोदी सरकार उन सबको उखाड़ फेंकेगी और इस तरह राज्यसभा में भी बहुमत हासिल करने में कामयाब रहेगी। उसके बाद हम  विकास के वह सारे काम करेंगे, जो अभी संवैधानिक मजबूरी की वजह से नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए विरोधी हमारी मजबूरी को कमजोरी समझने की भूल न करें। समझदारों के लिए इशारा ही काफी है। लिहाजा थोड़े लिखे को बहुत समझें। भारत माता की जय। मोदी जी की जय।

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