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| Courtesy: BBC Hindi |
सेवा में
श्री गोपाल शेट्टी
भाजपा सांसद, मुंबई
महोदय,
आज ही कहीं पढ़ रहा था कि महाराष्ट्र में इस साल जनवरी से अब तक 124 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। मन उदास था। तभी किसानों की खुदकुशी से संबंधित आपके ताजा बयान पर नजर पड़ी। वही, जिसमें आप कह रहे थे- ''किसानों की खुदकुशी की वजह भुखमरी, बेरोजगारी और कर्ज़ नहीं है, बल्कि किसानों में आत्महत्या का फैशन चल पड़ा है। खुदकुशी के बाद मिलने वाले 5-6 लाख रुपये के लालच में ही ये किसान जान दे रहे हैं। राज्य सरकारें भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं। किसानों को मुआवजा देने की होड़ जो लगी है।'' खास बात ये है कि आपका यह बयान ऎसे समय में आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश के सिहोर में 'किसान फसल बीमा योजना' का शुभारंभ कर रहे थे। किसानों की खुदकुशी को अगर आपने फैशन से जोड़ा है तो जाहिर है कुछ तो गंभीरता से सोचा ही होगा। आखिर आप देश की एक जिम्मेदार पार्टी भाजपा के सांसद हैं। दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का सदस्य होना ही गर्व की बात है, आप तो संसद सदस्य भी हैं। सब जानते हैं कि काबिल और देशभक्त लोगों को ही बीजेपी में रहकर 'देशसेवा' करने का सौभाग्य मिलता है।
जमीनी हकीकत और खेती-किसानी से जुड़े अर्थशास्त्र की आपको 'अच्छी समझ' है। ऎसा शायद इसलिए है कि आप भी जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं। गांवों की जमीन और मिट्टी में पले-बढ़े हैं। खेती-किसानी, ग्रामीण भारत को नि:संदेह आपने करीब से देखा होगा! किसान खेती के नाम पर कहां और कितना 'घपला' करते हैं, बेशक ये सब आपको अच्छी तरह मालूम होगा। आपकी इसी काबिलियत और समझदारी को देखते हुए ही भारतीय जनता पार्टी ने आपको लोकसभा का टिकट दिया होगा। आपके बयान से साफ है कि आप जहां-तहां, जब-तब आत्महत्या करने वाले 'शातिर' किसानों की साजिशों और 'चालाकियों' से भी अच्छी तरह वाकिफ हैं। ये 'धूर्त' किसान फैशन के चक्कर में अपनी जान देते हैं और नाम मोदी सरकार का खराब होता है। सरकार को बेवजह बदनाम करने के इस 'किसानी तरीके' की जितनी निंदा की जाए, कम है। कहां तो दुनिया भर में मोदी सरकार की कामयाबी का 'डंका' बज रहा है और कहां ये किसान आत्महत्या कर अपने घर में ही सरकार की नाक कटाने पर तुले हुए हैं। हो सकता है इसके पीछे भी आईएसआई, अलकायदा, लश्कर-ए-तैय्यबा और हाफिज सईद का हाथ हो। मोदी सरकार की कामयाबी और वाहवाही उनसे बर्दाश्त जो नहीं हो रही है।
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| Gopal Shetty, MP, BJP. |
शेट्टी जी, तो कुल मिलाकर निष्कर्ष ये निकलता है कि खुदकुशी करने वाले किसान कैरेक्टरलेस और कायर होने के साथ-साथ फैशन से वशीभूत भी होते हैं। फैशन से एक बात और याद आई कि हो सकता है कि ये खेती से मिलने वाले अपार धन को रेबैन के गॉगल्स, वुडलैंड के जूते और रीबॉक की महंगी टीशर्ट खरीदने में जाया कर देते हों! जब जेब खाली हो जाती होगी तब याद आता होगा कि सुसाइड करना भी तो फैशन है, बस इसीलिए कीटनाशक पी लेते होंगे या फिर पेड़ से लटककर फांसी लगा लेते होंगे। अल्पबुद्धि कहीं के। अगर फैशन का इतना ही शौक है तो खुदकुशी करने से पहले एक बार आप से ही मिल लेते। आप किसान मामलों के जानकार होने के नाते उन्हें फैशन के दो-चार टिप्स तो दे ही देते। लेकिन नहीं, फैशन की इतनी जल्दी पड़ी है कि बिना खबर किये, बिना प्रेस नोट जारी किये ही सुसाइड कर लेते हैं। उनकी इस फैशनपरस्ती से खामखां सरकार की बदनामी होती है।
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| Mallya with calendar girls |
बहरहाल, सांसद शेट्टी जी, आपके लिए ट्विटर पर किसी ने एक मैसेज छोड़ा है। सोचा आप तक पहुंचा दूं। ''आत्महत्या करना किसानों के लिए फैशन बन चुका है। गोपालजी! ऐसा है तो तेजी से आगे बढ़ती दुनिया में आप पिछड़ गए। एक प्रयास आपको भी कर लेना चाहिए लेटेस्ट ट्रेंड है।'' एक और मैसेज है। शायद आपके किसी फैन ने बहुत गुस्से में लिखा है। ''ये दिव्यांग हैं। एक्चुअली मोदी काका ने ये सुविधा इन्ही 'अ'माननीय लोगों को विशेष तौर पर ध्यान में रखकर दी है। ताकि मानसिक विकलांग बोलने से इनकी भावना ना आहत हो जाए।''
आपका शुभचिंतक
रवींद्र रंजन, एक आम नागरिक


