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मां को एक बेटी का भावुक ख़त, किसी नायिका सी ख़ूबसूरत हो तुम



-मधूलिका चौधरी

प्यारी मम्मी,
यह एक बेहद मुश्किल दिन था, कई बार आपको चिट्ठी लिखने का मन किया फिर मैंने खुद को रोक लिया कि अब बात बात पर तुमको चिट्ठी लिखना कोई बहुत अच्छी बात नही है. तुम थीं तो हम लोग तुमसे छिपकर आपस मे मजाक करते थे कि हर राखी पर मामा के घर जाने वाली कुप्रथा कब खत्म होगी. पर इस राखी तुमको जानकर ताज़्जुब भी होगा और ख़ुशी भी होगी कि हम सब मामा के घर गए और घर मे मटर पनीर और रायता बनाकर गए थे फिर भी मामी के एक बार कहते ही दोपहर का खाना वहीं से खाकर आए.


पिछली राखी पर डिनर में सिंवई नही बनाई थी तो तुम गुस्सा हो गई थी, इस बार तुम्हारी बहू दिन भर की थकी गाँव पँहुची है अभी अभी फिर भी कह कर गई है कि जाकर सिंवई जरूर बनाउंगी.

तुमको खुशी होती होगी कि तुम नही हो फिर भी सब तुम्हारा कितना ख्याल रखते हैं. आज दिन में कई बार आँखें भर भर आईं और कई बार संभाला खुद को.दरअसल सुबह सात बजे से ही जबसे मामा जी आपको फोन करना शुरू करते थे कि कितनी देर में आ रही हो? शायद मामा जी ने भी कई बार तुम्हारा नम्बर कांटेक्ट में निकाला होगा और खुद को रोका होगा और मामी..वो तो खुद को रोक भी नही पाती. तुम्हारा ज़िक्र आते ही रो देती हैं इसीलिए बहुत चाहकर भी मैं उनसे मिलने जाने की हिम्मत ही नही जुटा पाती.


इस बार मामा जी ने अंकित के जन्मदिन वाली वीडियो लगाई जिसमे वो तुमको खोज रहे थे. तुम दिखी नही तो छोटी मासी से पूछा कि बहिनी नही दिख रही, किचेन में जुटी होंगी...मासी ने बताया. फिर तभी ग्रुप फोटो के लिए कोई तुमको बुलाकर लाया, काली साड़ी में गोरी चिट्टी, लम्बी छरहरी किसी नायिका सी ख़ूबसूरत तुम..

आज के दिन के लिए नई साड़ी, मैचिंग चूड़ी, और कितनी तैयारियाँ होती थी तुम्हारी..तुम्हारे होने से लगा कि साठ साल की उम्र में भी इस त्यौहार का और भाई भौजाई का होना कितना मायने रखता है. यार मम्मी हम लोग तो किसी तरह संभाल ही रहे हैं खुद को पर मामा सच मे बहुत अकेले पड़ गए हैं...मामी और भी ज्यादा..


इतनी भी चिन्ता मत करो..हाथ से बंटकर सिंवई सावित्री ने बनाई और मामी के लिए लेकर गई ठीक उसी तरह जैसे हमेशा तुम बनाती थी लेकिन मामी उसे देखकर भी रो पड़ीं... अब बताओ कोई किसी को कैसे संभाले..यह एक मुश्किल दिन था हमारे लिए और मामा के लिए और ज्यादा लेकिन यह भी बीत ही गया.

बी पी इन दिनों बढ़ा रहता है मम्मी, मुझे हमेशा से शिकायत थी कि तुम्हारी कोई अच्छी चीज मुझे नही मिली. न गोरा रंग, न मासूम गढ़न, न लम्बा कद न गुण न व्यवहार न यश. सब खराब खराब मिला जैसे सेंसिटिव स्किन जो सूती और खादी के सिवा कोई छुअन सह नही पाती और अब रहा सहा बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर भी. यह तो खराब बात है ना मम्मी..मुझे बढ़े हुए ब्लड प्रेशर से इतनी दिक्कत नही है लेकिन अच्छा अच्छा वाला भी मिलना चाहिए था ना. तुम जहाँ होगी तुम्हारे लिए भी बेहद कठिन होगा सब कुछ, समझ सकती हूँ मै..


बाकी बच्चों की चिन्ता में दुबली मत हो जाना. कोई बात करने को कहने को न हो तब भी शनीचर इतवार में से एक रोज हम लोग जरूर ही फोन करते हैं..सबका ख्याल रखते हैं..तुम्हारी बहुरिया की दुनिया भर की बातें मुझे चाहे समझ न आए फिर भी मैं आराम से सुनती हूँ.. खुश रहना तुम भी..अच्छा..
खूब जोर से गले लगकर प्यार तुमको...
तुम्हारी बिटिया.

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