जेएनयू में 9 फरवरी को हुई देशविरोधी नारेबाजी के मामले में फरार पांच आरोपी कैम्पस लौट आए हैं। रविवार की रात उमर खालिद ने यूनिवर्सिटी कैंपस में स्टूडेंट्स को संबोधित किया।
साथियों,
मेरा नाम उमर खालिद ज़रूर है, लेकिन I am not a terrorist. सबसे पहले आज यहां इस समय और पिछले कई दिनों से जितने छात्र सड़कों पर, इस कैंपस के अंदर, इस कैंपस के बाहर और जितने फैकल्टी ...जितने कामरेड इन द फैकल्टी टू हैव बीन प्रजेंट इन दिस फाइट...आई वुड लाइक टू थैंक्स एंड कांग्रेच्यूलेट ईच वन ऑफ यू ।
आई अंडरस्टैंड व्हेन आई एम सेइंग दिस। ये लड़ाई कुछ हम 5-6 लोगों के लिए नहीं थी। आज ये लड़ाई हम सारे लोगों की लड़ाई है। आज से ये लड़ाई इस विश्वविद्यालय की लड़ाई है। आज ये लड़ाई सिर्फ विश्वविद्यालय की नहीं, इस देशभर के हर विश्वविद्यालय की लड़ाई है और सिर्फ विश्वविद्यालयों की नहीं इस समाज की भी लड़ाई है कि आज आने वाले दिनों में हमारा कैसा समाज होगा।
साथियों अभी कुछ दिन, पिछले 10 दिनों में मुझे अपने बारे में ऐसी-ऐसी बातें जानने को मिली हैं, जो मुझे खुद नहीं पता थीं। मुझे पता चला है कि मैं दो बार पाकिस्तान होकर आया हूं। मेरे पास पासपोर्ट नहीं है लेकिन फिर भी मुझे पता चला कि मैं दो बार पाकिस्तान हो के आया हूं। फिर मुझे पता चला, जब ये बात का गुब्वारा फट गया, फिर पता चला कि मैं मास्टमाइंड हूं। मतलब जेएनयू के स्टूडेंट दे हैव वंडरफुल माइंड बट आई वॉज द वन फोकस्ड दैट आई एम द मास्टरमाइंड टू इंश्योर्ड दिस इंटायर्ड प्रोग्राम एंड आई वॉज प्लानिंग दिस प्रोग्राम इन सेवेंटीन, एट्टेटीन यूनिवर्सिटीज, आई डू नॉट नो, आई सीरियसली डिड नॉट नो माई इनफ्लूएंस वाज सो ह्यूज देन दे सेड दैट आई वाज प्लानिंग दिस मीटिंग फॉर द लास्ट टू थ्री मन्थ्स।
मतलब इस तरीके से अगर एक पब्लिक मीटिंग कराने के लिए...मतलब अगर जेएनयू में एक पब्लिक मीटिंग कराने के लिए 10 महीने लगे तो पता नहीं जेएनयू ठप हो जाएगा। फिर बोले थे न जब ये बात भी काउंटर हो गया तो बोले थे ना कि मैंने 800 कॉल की हैं पिछले कुछ दिनों में। मतलब कोई सुबूत, कोई..मतलब एलेजेडली भी बोलने की ज़रूरत नहीं। मीडिया को किया है और कहां-कहां किया है, गल्फ में किया है कश्मीर में किया है। अरे एक सुबूत तो लाओ, पहली बात तो ये है कि करने से कुछ होता नहीं, अगर किया भी होता, लेकिन कोई सुबूत, कोई सुनवाई और कोई कुछ वो नहीं है, मतलब शर्म इन लोगों को बिल्कुल नहीं आती
अगर हम ये अपेक्षा करें कि ये लोग शर्म करेंगे तो वी विल वी फूलिंग आवर सेल्फ, मतलब द वे अगेंस्ट ऑल ऑफ अस द मीडिया हैज...मीडिया ट्रायल रियल मीडिया ट्रायल, मतलब द वे दे हैव ट्राइड टू फ्रेम अस, द वे दे हैव प्रोफाइल अस और मतलब एक आईबी से, सरकार से आ गया कि जैश-ए-मोहम्मद का कोई लिंक नहीं है, उसके बाद भी किसी ने माफी मांगना डिसक्लेमर देना कुछ करने की ज़रूरत नहीं है । मतलब, जब मैंने पहली बार देखा तो हंसी आई कि यार जैश-ए-मोहम्मद को पता चलेगा तो शायद झंडेवालान पर प्रोटेस्ट करने लगे कि मेरा नाम उनके साथ जोड़ा जा रहा है। लेकिन मतलब कुछ-कुछ मतलब, उनसे वही बात है कि अपेक्षा करना वो नहीं है, जिस किस्म से झूठ बोले गए, जिस किस्म की बातें की गईं।
अगर इन मीडिया वालों को लगता है ये लोग बच जाएंगे, तो ऐसा नहीं होगा। आप लोगों ने इस देश में, इस देश के लोगों के खिलाफ कोई आदिवासी है तो उसे माओवादी बोल के, कोई मुसलमान है तो उसको आतंकवादी बोल के, जिस तरीके से एक सिलसिला चला है और इसी तरीके से मीडिया ट्रायल और पूरा स्टेट अपेरेटस उसके पीछे लगा रहता है। शायद बहुत सारे लोग बेबस होते हैं, उनके लिए बोलने वाले बहुत कम लोग होते हैं। लेकिन भाई साहब आप लोग गलत लोगों से भिड़ गए। जेएनयू के छात्र आपको इसका मजा चखाएंगे।
एक-एक मीडिया चैनल को इसकी जवाबदेही करनी पड़ेगी। जिन लोगों के खिलाफ उन्होंने इस तरीके से वो किया है, जब एक समय बाद अगर मैं किसी बात के लिए कन्सर्न था, मैं अपने लिए बहुत कन्सर्न नहीं था, क्योंकि मुझे पूरा भरोसा था कि आप सारे लोग हज़ारों की तादाद में होंगे और मुझे पता थ। लेकिन अगर मुझे कन्सर्न आने शुरू हुए और मैं पैनिक करना शुरू हुआ, मैं जब करना शुरू हुआ, जब मैं अपनी बहन की और अपने पिता के स्टेटमेंट देखें। जिस तरीके से मेरी बहन को, मेरी कई बहनें हैं और सब लोगों को, जब लोग उन लोगों ने आकर सोशल मीडिया पर लिखना शुरू किया, जिस तरीके से अलग-अलग किस्म की धमकियां देनी शुरू करी, किसी ने बोला बलात्कार कर देंगे, किसी को बोला एसिड डाल देंगे, किसी को बोला तुम्हें हम जान से मार देंगे।
मुझे वही समय याद आ रहा था, जब बजरंग दल के लोग कंधमाल में एक क्रिश्चन नन के साथ रेप कर रहे थे, वहां भारत माता की जय बोल रहे थे। अगर उस दिन कॉमरेड कन्हैया के 11 फरवरी के भाषण को याद करुं कि अगर तुम्हारी भारत माता में, ये तुम्हारी भारत माता है तो ये हमारी भारत माता नहीं है, और हमें इस बात का कोई शर्म नहीं है।
हम लोगों को उसके बाद जब मेरे पिता से बात किया, बात क्या किया तो इंट्रोगेट किया उन्हें वहां जिस तरीके से उनका पुराना कुछ निकालकर और बोला गया कि यहां से ये लाया गया है, मतलब हर किस्म से किसी तरीके से फ्रेम कर दो। कुछ लोग हैं, कुछ जर्नलिस्ट हैं, कुछ छी न्यूज में हैं, कुछ एक भाई साहब हैं, टाइम्स नाऊ में , मैं उनका नाम नहीं लेना चाहूंगा। वैसे उनके कुछ ऎसे छोटे-मोटे छुटभैये रिपोर्टर भी हैं। वो सारे लोग मतलब उनको इतनी नफरत कहां से आती है, इतना गुस्सा कहां से आता है, जेएनयू छात्रों पर, मुझे समझ में नहीं आता। इतनी नफरत पालते कैसे हैं ये लोग?
मतलब जिस तरीके से मेरा मीडिया ट्रायल हुआ और मेरा मतलब मैं यहां बात बोलना चाहूंगा, एक बात अपने पर एक छोटी सी बात फोकस करके। आई सेड दिस समटाइम्स अर्लियर आलसो आई रिपीट दिस, फॉर द लास्ट सिक्स ईयर्स व्हेन आई हैव डन पॉलिटिक्स इन दिस कैंपस, सेवेन इयर्स आई हैव डन पॉलिटिक्स इन दिस कैंपस, आई हैव नेवर थॉट ऑफ माईसेल्फ एज ए मुस्लिम। आई हैव नेवर आलसो प्रोजेक्टेड माईसेल्फ एज ए मुस्लिम। और ये बात मुझे लगी कि आज जो समाज में दमन है वो सिर्फ मुसलमानों पर नहीं है। अलग-अलग हर शोषित तबके पर है, चाहे आदिवासी हो, दलित हो सब पर दमन है।
साथियों,
मेरा नाम उमर खालिद ज़रूर है, लेकिन I am not a terrorist. सबसे पहले आज यहां इस समय और पिछले कई दिनों से जितने छात्र सड़कों पर, इस कैंपस के अंदर, इस कैंपस के बाहर और जितने फैकल्टी ...जितने कामरेड इन द फैकल्टी टू हैव बीन प्रजेंट इन दिस फाइट...आई वुड लाइक टू थैंक्स एंड कांग्रेच्यूलेट ईच वन ऑफ यू ।
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| Umar Khalid in JNU. Courtesy: ABPnews |
साथियों अभी कुछ दिन, पिछले 10 दिनों में मुझे अपने बारे में ऐसी-ऐसी बातें जानने को मिली हैं, जो मुझे खुद नहीं पता थीं। मुझे पता चला है कि मैं दो बार पाकिस्तान होकर आया हूं। मेरे पास पासपोर्ट नहीं है लेकिन फिर भी मुझे पता चला कि मैं दो बार पाकिस्तान हो के आया हूं। फिर मुझे पता चला, जब ये बात का गुब्वारा फट गया, फिर पता चला कि मैं मास्टमाइंड हूं। मतलब जेएनयू के स्टूडेंट दे हैव वंडरफुल माइंड बट आई वॉज द वन फोकस्ड दैट आई एम द मास्टरमाइंड टू इंश्योर्ड दिस इंटायर्ड प्रोग्राम एंड आई वॉज प्लानिंग दिस प्रोग्राम इन सेवेंटीन, एट्टेटीन यूनिवर्सिटीज, आई डू नॉट नो, आई सीरियसली डिड नॉट नो माई इनफ्लूएंस वाज सो ह्यूज देन दे सेड दैट आई वाज प्लानिंग दिस मीटिंग फॉर द लास्ट टू थ्री मन्थ्स।
मतलब इस तरीके से अगर एक पब्लिक मीटिंग कराने के लिए...मतलब अगर जेएनयू में एक पब्लिक मीटिंग कराने के लिए 10 महीने लगे तो पता नहीं जेएनयू ठप हो जाएगा। फिर बोले थे न जब ये बात भी काउंटर हो गया तो बोले थे ना कि मैंने 800 कॉल की हैं पिछले कुछ दिनों में। मतलब कोई सुबूत, कोई..मतलब एलेजेडली भी बोलने की ज़रूरत नहीं। मीडिया को किया है और कहां-कहां किया है, गल्फ में किया है कश्मीर में किया है। अरे एक सुबूत तो लाओ, पहली बात तो ये है कि करने से कुछ होता नहीं, अगर किया भी होता, लेकिन कोई सुबूत, कोई सुनवाई और कोई कुछ वो नहीं है, मतलब शर्म इन लोगों को बिल्कुल नहीं आती
अगर हम ये अपेक्षा करें कि ये लोग शर्म करेंगे तो वी विल वी फूलिंग आवर सेल्फ, मतलब द वे अगेंस्ट ऑल ऑफ अस द मीडिया हैज...मीडिया ट्रायल रियल मीडिया ट्रायल, मतलब द वे दे हैव ट्राइड टू फ्रेम अस, द वे दे हैव प्रोफाइल अस और मतलब एक आईबी से, सरकार से आ गया कि जैश-ए-मोहम्मद का कोई लिंक नहीं है, उसके बाद भी किसी ने माफी मांगना डिसक्लेमर देना कुछ करने की ज़रूरत नहीं है । मतलब, जब मैंने पहली बार देखा तो हंसी आई कि यार जैश-ए-मोहम्मद को पता चलेगा तो शायद झंडेवालान पर प्रोटेस्ट करने लगे कि मेरा नाम उनके साथ जोड़ा जा रहा है। लेकिन मतलब कुछ-कुछ मतलब, उनसे वही बात है कि अपेक्षा करना वो नहीं है, जिस किस्म से झूठ बोले गए, जिस किस्म की बातें की गईं।
अगर इन मीडिया वालों को लगता है ये लोग बच जाएंगे, तो ऐसा नहीं होगा। आप लोगों ने इस देश में, इस देश के लोगों के खिलाफ कोई आदिवासी है तो उसे माओवादी बोल के, कोई मुसलमान है तो उसको आतंकवादी बोल के, जिस तरीके से एक सिलसिला चला है और इसी तरीके से मीडिया ट्रायल और पूरा स्टेट अपेरेटस उसके पीछे लगा रहता है। शायद बहुत सारे लोग बेबस होते हैं, उनके लिए बोलने वाले बहुत कम लोग होते हैं। लेकिन भाई साहब आप लोग गलत लोगों से भिड़ गए। जेएनयू के छात्र आपको इसका मजा चखाएंगे।
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| Courtesy: tehelka |
मुझे वही समय याद आ रहा था, जब बजरंग दल के लोग कंधमाल में एक क्रिश्चन नन के साथ रेप कर रहे थे, वहां भारत माता की जय बोल रहे थे। अगर उस दिन कॉमरेड कन्हैया के 11 फरवरी के भाषण को याद करुं कि अगर तुम्हारी भारत माता में, ये तुम्हारी भारत माता है तो ये हमारी भारत माता नहीं है, और हमें इस बात का कोई शर्म नहीं है।
हम लोगों को उसके बाद जब मेरे पिता से बात किया, बात क्या किया तो इंट्रोगेट किया उन्हें वहां जिस तरीके से उनका पुराना कुछ निकालकर और बोला गया कि यहां से ये लाया गया है, मतलब हर किस्म से किसी तरीके से फ्रेम कर दो। कुछ लोग हैं, कुछ जर्नलिस्ट हैं, कुछ छी न्यूज में हैं, कुछ एक भाई साहब हैं, टाइम्स नाऊ में , मैं उनका नाम नहीं लेना चाहूंगा। वैसे उनके कुछ ऎसे छोटे-मोटे छुटभैये रिपोर्टर भी हैं। वो सारे लोग मतलब उनको इतनी नफरत कहां से आती है, इतना गुस्सा कहां से आता है, जेएनयू छात्रों पर, मुझे समझ में नहीं आता। इतनी नफरत पालते कैसे हैं ये लोग?
मतलब जिस तरीके से मेरा मीडिया ट्रायल हुआ और मेरा मतलब मैं यहां बात बोलना चाहूंगा, एक बात अपने पर एक छोटी सी बात फोकस करके। आई सेड दिस समटाइम्स अर्लियर आलसो आई रिपीट दिस, फॉर द लास्ट सिक्स ईयर्स व्हेन आई हैव डन पॉलिटिक्स इन दिस कैंपस, सेवेन इयर्स आई हैव डन पॉलिटिक्स इन दिस कैंपस, आई हैव नेवर थॉट ऑफ माईसेल्फ एज ए मुस्लिम। आई हैव नेवर आलसो प्रोजेक्टेड माईसेल्फ एज ए मुस्लिम। और ये बात मुझे लगी कि आज जो समाज में दमन है वो सिर्फ मुसलमानों पर नहीं है। अलग-अलग हर शोषित तबके पर है, चाहे आदिवासी हो, दलित हो सब पर दमन है।

