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मोदी भक्तों को एक मुस्लिम की चिट्ठी, शाहनवाज़ या मुख्तार को पीएम कैंडीडेट बनाएंगे?


- ताबिश सिद्दीकी
ठीक है.. आपके हिसाब से अरबी और उर्दू के नाम वाले (मुसलमान) मोदी से नफ़रत करते हैं...मगर फिर आप ये बताइये कि आप मोदी को क्यों प्यार करते हैं? आपके हिसाब से मोदी ने कला, साहित्य या विज्ञान के क्षेत्र में ऐसा क्या करिश्माई काम कर दिया है, जिससे आप उनके इतने दीवाने हैं?


मुसलमानों के पास मोदी से नफ़रत की पचास वजहें हैं...वो सब जग ज़ाहिर हैं, इसलिए उसके बारे में मैं न भी लिखूं तो भी आप जान जाएंगे.. और आपके पास भी मोदी के भक्ति की सिर्फ और सिर्फ एक वजह है.. और वो वजह भी मुस्लिम विरोध ही है.. मगर आप झुठलायेंगे इसे।

कभी आप इसे भी सोचिये कि जैसे आपने "हिन्दू शेर" चुना है वैसे आज़ादी के बाद से अब तक मुसलमान अपना "मुस्लिम शेर" चुनते आते तो शायद अब तक भारत का वातावरण बहुत अधिक विषाक्त हो चुका होता.. मगर मुसलमानों ने हमेशा किसे चुना? इंदिरा, राजीव, मुलायम, मायावती, अटल, मनमोहन जैसे लोगों को...आपके हिसाब से ये सब मुसलमान थे? मुसलमानों ने कभी अपने "धर्म" के किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाया है?

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भारत के मुसलमानों ने हमेशा हिंदुओं को वरीयता दी है...जब हमारे पुरखों के सामने ये सवाल आया कि वो हिंदुओं के साथ रहना पसंद करेंगे कि मुसलमानों के साथ तो उन्होंने हिंदुओं को चुना.. और ये तभी से चला आ रहा है.. मुसलमानों ने मुस्लिम शेर जिन्ना की जगह सर्वधर्म समभाव के मसीहा गांधी की क्षत्र छाया में रहने का फैसला किया।

आप धार्मिकता के दलदल में बुरी तरह फंसे हुए हैं, मगर मुसलमानों पर ख़ूब मज़े लेते हैं और अब आपको अपनी धार्मिकता दिखनी बंद हो चुकी है...आपकी मोदी भक्ति की और क्या वजह है? किस धार्मिक कट्टरता की वजह से आप मोदी पर लहालोट हैं?

आपको डर लग जाता है अगर हम जैसे लोग मोदी पर एक चुटकुला लिख दें और आप मेरी पोस्ट पर सेक्युलर हिंदुओं को आगाह करने लगते हैं क्यूंकि जिस हिन्दू राष्ट्र के सपने के साथ आप मोदी की भक्ति में लीन हैं, उसमे आपको सेंध लगती दिखती है। आप बेचैन हो जाते हैं। प्रधानमंत्री पद की गरिमा, ये गरिमा वो गरिमा...ये सब आप किसे समझाते हैं? और वो प्रधानमंत्री जो त्योहारों पर भी छांट-छांट कर लोगों को बधाई दे और राष्ट्रपति द्वारा आयोजित इफ्तार से भी कन्नी काट ले?

हम जैसे अगर मोदी की इज़्ज़त करते हैं तो वो मोदी की वजह से नहीं...वो आपकी वजह से..आप जैसे दोस्तों और भाइयों की वजह से.. क्यूंकि आप भक्त हैं, इसलिए हम आपकी भावनाओं की वजह से चुप रहते हैं।

आप वाह-वाह कीजिये मन की बात सुन कर, आप उनके भाषण सुनकर मन्त्र मुग्ध हो जाइये, मगर आप हम सबको अपने जैसा मानसिक विकलांग मत बनाने की कोशिश कीजिये। हमने बहुत भाषण सुने हैं। बहुत मन की बात सुनी है...बुद्ध से लेकर रूमी और नीरज से लेकर ग़ालिब तक समझने की हैसियत है हमारी। इसलिए अब हमे मिथुन की फिल्मों के डॉयलोग का फैन बनने को मत बोलिये।

आप साम्प्रदायिक नहीं हैं? शाहनवाज़ हुसैन या मुख्तार अब्बास को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाइयेगा? और ऐसे ही टूट के वोट दीजियेगा उन्हें? प्रधानमंत्री छोड़िये आप मुख्यमंत्री नहीं बनाइयेगा उन्हें, भले वो आपकी भक्ति पार्टी के ही क्यों न हों।

मोदी से हमारा विरोध वैचारिक है... कल वो प्रधानमंत्री अगर न रहें तो हम शायद ही कभी उनके बारे में कुछ लिखें.. मुसलमानो को छोड़िये आप अपने दिल में झांकिए। आप विषाक्त रूप से धार्मिक हो चुके हैं।

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