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देवराज इंद्र के नाम चिट्ठी, बारिश जैसे अहम विभाग के लिए आप अलग मंत्री क्यों नहीं रखते?


- विवेक सिंह

महोदय !
हम जानते हैं कि यह समय देवताओं के सोने का है, लिहाज़ा आप सो रहे होंगे, और देवउत्थान एकादशी से पहले किसी भी सूरत में जागने वाले नहीं। पर हालात ही कुछ ऐसे हैं कि बिना लिखे रहा नहीं जाता। यद्यपि जब आप जागेंगे तब तक हालात 'का वर्षा जब कृषि सुखानी' वाले हो चुके होंगे तथापि यदि आप इससे अगले साल के लिए कुछ सबक लेंगे तो भी हम स्वयं को धन्य समझेंगे। आशा है जब आप जागेंगे तो हमारी चिट्ठी को अवश्य पढ़ लेंगे।


जरा विचार करके देखें कि देवशयनी एकादशी से देवउत्थान एकादशी के बीच एक लम्बा अन्तराल होता है। जब करोड़ों लोग आपके ऊपर निर्भर हों तो आप सब चैन से एक साथ कैसे सो सकते हैं? स्वर्ग की गवर्नमेन्ट के मुखिया होने के नाते सारा उत्तरदायित्व आपका ही बनता है। बाकी सब तो आपके पिछलग्गू ठहरे।

आपने अपने मन्त्रियों का विभाग वितरण न जाने कब किया होगा। क्या आपको नहीं लगता कि लम्बे समय तक मन्त्रियों के विभाग बदले नहीं जायेंगे तो वे निरंकुश और भ्रष्ट हो सकते हैं? और तो और वे लम्बे समय एक ही विभाग में रह कर इतने ताकतवर बन सकते हैं कि आपकी सर्वोच्चता को चुनौती देने के बारे में भी सोच सकते हैं! इसीलिए तो यहाँ धरती पर भी जो चालू टाइप प्रधानमन्त्री होते हैं वे किसी मन्त्री को ज्यादा दिन एक विभाग में टिकने नहीं देते।

पृथ्वी पर कोई यदि परिश्रम करके आपको चुनौती देने की पोजीशन में आना चाहता है तो आपका आसन डोलते लगता है, और आप उचित या अनुचित कोई भी तरीका अपनाकर उसे हतोत्साहित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते। ऐसे में जाहिर है आपके ऊपर लोगों की निर्भरता ज्यों की त्यों बनी रहेगी। हालाँकि यहाँ धरती पर भी कई सरकारें चलती हैं पर वे सब तो क्रेडिट लेने के लिए ही हैं। देश ग्रोथ करता है तो क्रेडिट सरकार ले लेती है और वर्षा अच्छी नहीं हुई तो ठीकरा आपके ही सिर फूटता है। ऐसे में आप स्वयं विचार करें कि जनता को सरकार भरोसे छोड़कर आप अपनी जिम्मेदारियों को ऑटो मोड पर डालकर मंत्रियों सहित सोने जायें यह भला कहाँ तक उचित है?


ऐसा भी नहीं लगता कि आपके पास देवता पॉवर की कमी हो। तैंतीस करोड़ देवी-देवता कम नहीं होते। एक मन्त्रालय में आप चाहें तो कई मन्त्री एक साथ नियुक्त कर सकते हैं। ऐसे में आपका वर्षा जैसा महत्वपूर्ण मन्त्रालय अपने पास रखना किसी दृष्टिकोण से उचित प्रतीत नहीं होता। हमें नहीं लगता कि आप जागते समय भी उर्वशी, मेनका, रम्भा आदि रमणियों के नृत्य-दर्शन से मुक्ति पाकर बादल से फीडबैक लेने के लिए कुछ समय निकाल पाते होंगे और उससे पूछते होंगे कि कहाँ बरसा और कहाँ नहीं बरसा। वैसे हम सहमत हैं कि नृत्य देखते रहना भी कोई छोटा काम नहीं।

हाँ यह सही है कि सभी देवता मन्त्री बनने के काबिल नहीं होते। पर इस स्थिति में क्या उनके देवता बने रहने पर सवाल नहीं उठने चाहिए? आखिर ऐसे देवताओं की जरूरत ही क्या है? नये चुनाव कराये जा सकते हैं। इन्सानों में कितने ही करोड़ ऐसे लोग मिल जायेंगे जो योग्य होते हुए भी देवता बनने की लालसा मन में पाले हैं। ऐसे में उनकी सेवायें ली जा सकती हैं, और नाकारा देवताओं को कीड़े मकोड़े बनाकर धरती पर डम्प किया जा सकता है। कृपया इसका यह मतलब कदापि न निकाला जाय कि हमारे ऐसा सुझाव देने के पीछे हमारी देवता बनने की कोई महत्वाकांक्षा है। हम क्लीयर कर देना चाहते हैं कि हमारी अभी स्वर्गवासी होने की कोई इच्छा नहीं है। हमें धरती पर ही बहुत मज़ा आ रहा है।

यदि आपने इन्सान को अपनी सरकार में शामिल कर लिया तो इसका सबसे बड़ा फ़ायदा यह होगा कि आपको लम्बी नींद की समस्या से निज़ात पक्का मिल जाएगी। क्योंकि इन्सान को सर्वदा आपके सोने का इन्तज़ार रहेगा और आपके सोते ही वह आपकी जड़ें खोदने लग जाया करेगा और आप सावधानी हटी दुर्घटना घटी वाली स्थिति में आकर हर समय चौकन्ने रहने लगेंगे। और अनिद्रा को, जिसे फ़िलहाल एक रोग समझा जाता है, जल्दी ही देवी का दर्जा मिल जाएगा। उसके बाद अगर देवता सोयेंगे भी तो शिफ्टों में ! (ब्लाग स्वप्नलोक से)

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