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'मन की बात' में आज का विषय है गर्मी, मितरों गर्मी के मौसम में बहुत पसीना आता है

-असीम तिवारी

मेरे प्यारे देशवासियों गर्मी आ चुकी है..
जी सोचा, आप सभी को बता दूँ आज मन की बात में..कहीं आप ये ना सोंच रहे हों कि "ठंडी में पसीना चले ना भूख ना प्यास लगे, यार यही प्यार तो नही, डैडी से पूछूंगा" तो आपके डैडी बल्कि सबके डैडी.. परमपिता यानी कि मैं बता दूँ नहीं ये प्यार नहीं, अपितु गर्मी से आया हुआ पसीना है. गर्मी एक मौसम होता है मितरों.. अक्सर ये शर्दी के बाद आता है..जी, वही शर्दी जिसके बारे में मन की बात एपिसोड 200 में आपको बताया था मैंने कि शर्दी बढ़ नही रही है आप बूढ़े हो रहे हैं..

उसी तरह गर्मी भी बढ़ नही रही है, बस आपके अंदर का पानी ऊपर आसमान में जा रहा है ताकि समय पर बारिश हो सके ..बारिश एक और मौसम होता है दोस्तों पर उसके बारे में किसी और एपिसोड में चर्चा करेंगे..आज का विषय है गर्मी. गर्मी मूलतः दो प्रकार की होती है भाइयों बहनों..

- सड़ी गर्मी
- कुत्ते जैसी गर्मी

सड़ी गर्मी मार्च के प्रारंभ से मई के अंत तक पड़ती है..इस दौरान अक्सर माँ गंगा बुलाती है, डुबकी लगवाने को ताकि कुछ राहत मिले और ताऊ हिमालय भी बुला लेते हैं कि हो सके तो यहाँ की बर्फ गोला खा लो बच्चों उससे शर्दी का एहसास मिल जायेगा दो पल को..सनातन धर्म में सड़ी गर्मी का उल्लेख हमें गरुण पुराण के खंड चार में मिलता है, इसमें बताया गया है कि ऋषि दुर्वासा सड़ी गर्मी से परेशान रहा करते थे..सड़ी गर्मी ने उनके मस्तिष्क में ही घर बसा लिया था, जिसके फलस्वरूप वे सारा सारा दिन आते जाते लोगो को श्राप फेंक फेंक के मारा करते थे..सड़ी गर्मी में हमें घर के अंदर रहना चाहिये और सिर्फ भाजपा को वोट डालने ही बाहर निकलना चाहिये..

गर्मी का दूसरा रूप है कुत्ते जैसी गर्मी ये सामान्यतः जून से जुलाई तक होती है और उत्तर भारत में अगस्त तक भी पाई गई है.. कुत्ते जैसी गर्मी के नाम के पीछे का रहस्य अभी वैज्ञानिक ढूँढ़ पाने में असफल रहे हैं, पर माना जाता है भारतीयों का किसी भी अवस्था के भीषणतम होने का पैमाना कुत्ते से कंपेयर करने से ही उजागर होता है..जैसे क्या कुत्ते जैसी ठंड पड़ रही है, आज कुत्ते सरिके बारिश हुई, कुत्ते जैसा खाना खाता है, आदि आदि.

कुत्ते जैसी गर्मी में घर में रहें और घर में भी फ्रिज के अंदर बिस्तर लगवा लें वही ठीक होता है..पानी की जगह बर्फ खायें.. और मेरी रैलियों में आना हो तभी घर से बाहर निकलें. मितरों और दो ज़रूरी बातें याद रखें.. इन दोनों ही तरह की गर्मियों में गन्ने से चीनी बनाने से परहेज करें और गन्ने से जूस बना के पियें.. दूसरा धूप में खड़े वाहन पर बैठने से पहले किसी पास के थाने में जाकर पुलिस से दो चार डंडे तशरीफ़ पर पड़वा लें, ताकि मामला सुन्न हो जाये और वाहन पर बैठने पर तकलीफ ना हो.
मन की बात में आज देश से जुड़े सबसे ज़रूरी समस्या पर आपको मेरी ज्ञानवर्धक उपयोगी बातें कैसी लगीं मोदी एप में जाकर दिये गये दो ऑप्शन "बहुत अच्छी,बहुत ज़्यादा अच्छी" में से एक क्लिक कर ज़रूर बतायें. जय हिंद मितरों.. खुश रहिये जो ना रह पायें तो मुझे सेवा का मौका दीजिये.
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