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कुत्ते को क्यों मारा? कहीं वो 'देशद्रोही' तो नहीं था?



क्या उन कुत्तों ने कोई 'देशद्रोही' हरकत की?
क्या उन कुत्तों ने इंसानों स‌े 'आजादी' मांगी?
क्या उन कुत्तों ने देश विरोधी नारेबाजी की?
'भारत माता की जय' कहने स‌े इनकार किया?
तो फिर उस क़ातिल ने कुत्तों को क्यों मारा?
उस गुमनाम क़ातिल के नाम एक खुली चिट्ठी 


Dog killer caught on CCTV stabbing puppies
- रवींद्र रंजन

हे बेरहम इंसान,
सीसीटीवी कैमरे में दर्ज तुम्हारी तस्वीर देखी। देखने में तो तुम भी आम इंसान जैसे ही लगते हो। फिर पता नहीं तुमने ऎसा क्यों किया? इस हरकत की वजह तुम्हारी फितरत है या क्षणिक गुस्सा और आवेश, यह तो तुम ही बेहतर जानते होगे। लेकिन सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई तुम्हारी इस हरकत को देखकर हैरान हूं। परेशान हूं। स‌मझ में नहीं आ रहा कि तुम्हें क्या कहूं? तुम पर गुस्सा भी बहुत आ रहा है। जब स‌े स‌ीसीटीवी फुटेज में तुम्हारा चेहरा देखा है, तब स‌े यही स‌ोच रहा हूं कि आखिर इतनी नफरत तुम कहां स‌े लाए? शायद पहली बार किसी खबर की हेडलाइन ऎसे बनी होगी कि "एक इंसान ने एक कुत्ते की चाकू स‌े गोदकर हत्या की और चार कुत्तों को घायल किया।" स‌ीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि तुमने पहले एक कुत्ते को कुछ खाने के लिए दिया और उसके बाद उसे अपनी गोद में भी बैठाया। यहां तक तो तुम एक स‌ामान्य आदमी नजर आ रहे हो। लेकिन उसके बाद जिस तरह तुमने चाकू निकाला और उस बेजुबान पर ताबड़तोड़ वार कर उसके दो टुकड़े कर दिए, वो तो एक सामान्य इंसान नहीं कर स‌कता। इतना ही नहीं, तुमने अपने आस-पास आए दूसरे कुत्तों को भी चाकू मार कर घायल कर दिया। ऎस‌ा भी नहीं है कि वो देशविरोधी नारेबाजी कर रहे थे। इंसानों स‌े आजादी मांग रहे थे।

हैरानी इसलिए भी हो रही है कि जिस देश के प्रधानमंत्री को 'कुत्ते के पिल्ले' तक के मरने पर दुख होता है, उसी देश में तुम्हारे जैसा बेरहम कातिल भी रहता है। इंसानों के लिए इंसानों की नफरत के किस्से तो बहुत स‌ुने और देखे हैं, लेकिन तुम जैसा इंसान पहली बार देखा जिसे कुत्तों स‌े इतनी नफरत है कि चाकू लेकर उनकी जान लेने पर ही आमादा हो गया। वो तो स‌ीसीटीवी में तुम्हारी तस्वीरें रिकॉर्ड हो गईं, वर्ना अभी तक तुम्हारी इस वहशियाना हरकत का पता ही नहीं चल पाता। पता नहीं अब तक तुम और कितने कुत्तों को मौत की नींद स‌ुला चुके होगे। कितनों को मार-मारकर जख्मी कर चुके होगे। तुम्हारे दिल्ली शहर का ही वाक्या बताता हूं। अभी दो दिन पहले दक्षिण दिल्ली के मोती बाग की एक दुकान में जो डकैती हुई थी, उसमें दुकानदार के कुत्ते ने अपनी जान पर खेलकर पूरे परिवार को बचाया। अगर घर में कुत्ता नहीं होता तो वो बदमाश शायद पूरे परिवार को गोली मार देते। वह कुत्ता बदमाशों की पिस्तौल देखकर भी नहीं डरा। न ही पीछे हटा। न डरा। न डिगा। न छिपा। कोई इंसान होता तो क्या इतनी हिम्मत दिखा स‌कता था? क्या तुमने कभी स‌ोचा है कि कुत्ते को स‌बसे वफादार जानवर क्यों कहा जाता है। ऎसी तमाम वजहें हैं। तमाम उदाहरण हैं।


एक तो इंसान वैसे ही बदनाम हैं, दूसरा तुम जैसे लोगों की हरकतों स‌े उनका नाम और खराब होता है। पता नहीं किस बात का गुस्सा तुम जानवरों पर निकाल रहे थे। कहीं घर से झगड़ा करके तो नहीं निकले थे? मतलब कहीं का गुस्सा कहीं निकाल रहे थे? कोई तो बात होगी जिसकी वजह स‌े तुम्हें कुत्तों पर इतना गुस्सा आ गया। तुम्हारी हरकत ने पशु प्रेमियों के उस जख्म को कुरेद दिया है, जो उत्तराखंड के बीजेपी विधायक गणेश जोशी ने दिये थे। गणेश जोशी के बारे में तो तुमने स‌ुना ही होगा? उसने एक घोडे़ की टांग पर इतनी लाठी बरसाईं कि वो बेचारा हमेशा के लिए अपाहिज हो गया है। फिलहाल डॉक्टर नकली टांग लगाकर भी उसे खड़ा होने में स‌क्षम नहीं बना पा रहे हैं। अब अमेरिका स‌े उसके लिए अच्छी क्वॉलिटी का नकली पैर मंगाया जाएगा। उसे लगाने के बाद भी घोड़ा अब पहले की तरह हवा स‌े बातें नहीं कर पाएगा। स‌िर्फ काम चलाऊ जिंदगी ही जी पाएगा।

तुम्हारा चेहरा स‌ीसीटीवी में आ ही गया है। आज नहीं तो कल तुम पकड़े ही जाओगे। वैसे भी पैस‌ों का लालच बहुत बुरी चीज होती है। तुम्हारी गिरफ्तारी पर ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल नाम की स‌ंस्था ने एक लाख का इनाम घोषित किया है। इसलिए अब तो तुम्हें पुलिस का मेहमान बनना ही पड़ेगा। कोई इंसान ही तुम्हें पकड़वाएगा। एक लाख के लिए ही स‌ही। तुम्हारा पकड़ा जाना तो अब तय है, लेकिन देखना यह होगा कि तुम्हारे खिलाफ केस क्या चलता है। हत्या का केस तो चलने स‌े रहा। एक गली के मामूली कुत्ते की हत्या पर तो बिल्कुल नहीं। इस देश में इंसान के लिए एक जानवर की जिंदगी इतनी अहम कहां? अगर ऎस‌ा होता तो तुम उसकी हत्या ही क्यों करते? लेकिन तुम्हारी गिरफ्तारी के बाद हर कोई तुमसे यह जरूर पूछना चाहता होगा कि आखिर उन बेजुबानों ने तुम्हारा बिगाड़ा क्या था? कहीं उसने कोई देशद्रोही हरकत तो नहीं की थी? आजादी-आजादी के नारे तो नहीं लगाए?

तुम्हारी हरकत से आहत 
एक नागरिक 

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