कल मैं राजस्थान रोडवेज बस में दिल्ली से जयपुर के लिए सफ़र कर रहा था. ड्राइवर ने शाहजहाँपुर में बस हाइवे पर खुशबू होटल पर खाने के लिए रोकी. वहां मैंने देखा कि एक बुज़ुर्ग ने जो देखने में बहुत ही दरिद्र था, उसने एक आलू का पराठा आर्डर किया जिसका मूल्य 20 रुपये था. कुछ ही देर में वेटर दो पराठे और थोड़ा रायता ले कर आया और टेबल पे रख दिया! बुज़ुर्ग ने कहा कि मुझे एक ही चाहिए तो वेटर ने कहा 20 में दो मिलते हैं. उसके बाद वेटर एक छोले की प्लेट लाया और टेबल पे रख दी ! बुज़ुर्ग ने कहा कि नहीं चाहिए, तो वेटर ने कहा कि पराठे के साथ फ्री है, पर बुज़ुर्ग ने वो छोले नहीं खाये !
खाना ख़त्म करने पर जब बुज़ुर्ग पैसे चुकाने गया तो गल्ले पर बैठे होटल मालिक ने उन से 140 रुपये मांगे. हिसाब यूँ बताया गया कि 40 रुपये के दो पराठे, 20 रुपये रायता के और 80 रुपये छोले के ! बुज़ुर्ग के विरोध करने पर होटल मालिक ने उसे पिटाई करने की धमकी दी! होटल मालिक के पास बस का कंडक्टर भी बैठा था, जो ये सब देख कर हंस रहा था! उसकी तस्वीर भी यहां आप देख सकते हैं. बुज़ुर्ग ने कंडक्टर से शिकायत करते हुए कहा कि उसने कैसे होटल पर बस रोकी है तो कंडक्टर ने कहा की यहाँ तो ऐसे ही होगा, तूने खाया है तो चुकाना ही होगा, अन्यथा हम तुझे यहाँ छोड़ जाएंगे!
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बुज़ुर्ग ने गीली आँखों से 140 रुपये चुकाए और कहा की छोले पैक कर दो इस पर मेरे सामने वेटर ने छोले को वापस रसोई में ले जाकर छोले के डोंगे में मिला दिया और कहा कि आपके छोले तो कूड़े में फेंक दिए अब ! और सारे कर्मचारी और होटल मालिक व कंडक्टर हंसने लगे! ठीक इसी प्रकार और भी यात्रियों के साथ हुआ और सभी ने बस छूटने की जल्दी में गलत रकम चुकाई !
बस में चढ़ने पर मैंने कंडक्टर से बहस की तो उसने कहा जो बन सके कर लो, तो मैंने बस में जो शिकायत एवं सुझाव के मोबाइल नंबर्स लिखे थे उन पर कॉल करने की सोची, लेकिन जैसा कि आप तस्वीर में देख सकते हैं कि एक भी नंबर पूरा देखने लायक नहीं है ! रोडवेज के कर्मचारियों ने सभी नंबर्स में से कुछ अक्षर मिटा दिए हैं ताकि कोई भी उनकी शिकायत ना कर सके.
दोस्तों यह तो एक उदाहरण मात्र है. ऐसे किस्से हज़ारों की संख्या में पूरे राजस्थान और देश में रोडवेज कर्मचारी और होटल मालिकों की मिलीभगत से हो रहे हैं! हम सब इसे एक मामूली सी घटना मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन दोस्तों 140 रुपये किसी गरीब रिक्शा चालक की सारे दिन की मेहनत होती है, जिस पर उसका पूरा परिवार आश्रित होता है! हो सकता है की आप लोगों के लिए इस घटना का कोई महत्व ना हो, पर मुझे तो भीतर तक झकझोर गई है!
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मैं आप सभी आदरणीय नागरिकों से विनम्र अपील करता हूँ की इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करे और किसी एक भी निकृष्ट रोडवेज कर्मचारी और होटल मालिक का हृदय परिवर्तन करने में अपना छोटा सा योगदान अवश्य दे! फेसबुक पर यह पोस्ट मैं कुछ बड़े लोगो को टैग कर रहा हूँ, ताकि किसी बड़े सरकारी अधिकारी या नेता या मंत्री तक ये पोस्ट पहुंच सके और कोई तो कुछ सकारात्मक प्रयास करे. किसी को असुविधा हुई हो तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ ! भारत माता की जय.
आशीष कुमार शर्मा
रतनगढ़ राजस्थान
[अगर आप भी लिखना चाहते हैं कोई ऐसी चिट्ठी, जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो हमें लिख भेजें- merekhatt@gmail.com. हमसे फेसबुक, ट्विटर और गूगलप्लस पर भी जुड़ें]
खाना ख़त्म करने पर जब बुज़ुर्ग पैसे चुकाने गया तो गल्ले पर बैठे होटल मालिक ने उन से 140 रुपये मांगे. हिसाब यूँ बताया गया कि 40 रुपये के दो पराठे, 20 रुपये रायता के और 80 रुपये छोले के ! बुज़ुर्ग के विरोध करने पर होटल मालिक ने उसे पिटाई करने की धमकी दी! होटल मालिक के पास बस का कंडक्टर भी बैठा था, जो ये सब देख कर हंस रहा था! उसकी तस्वीर भी यहां आप देख सकते हैं. बुज़ुर्ग ने कंडक्टर से शिकायत करते हुए कहा कि उसने कैसे होटल पर बस रोकी है तो कंडक्टर ने कहा की यहाँ तो ऐसे ही होगा, तूने खाया है तो चुकाना ही होगा, अन्यथा हम तुझे यहाँ छोड़ जाएंगे!इसे भी पढ़ें...
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