बहुत मित्रों को बहुत तकलीफ़ रहती है कि मैं सिर्फ हिंदू धर्म की कुरीतियों के बारे में क्यों लिखता हूँ। मुसलमान धर्म, ईसाई धर्म आदि के बारे में क्यों नहीं लिखता हूं। इसको उदाहरण से कुछ यूं समझिये, कि आप कहते हैं कि मैं हिंदू धर्म की कुरीतियों की बात क्यों करता हूं, दूसरे धर्मों की क्यों नहीं। मेरा कहना है कि जिस घर में मैं पला बढ़ा हूं,मुझे उस घर की दीवारों, छतों, आदि के बारे में पता है मुझे कमजोरियों के बारे मे मालूम है। मैं अपने घर को महसूसता हूं। मैं तो अपने घर को मजबूत बनाना चाहता हूँ। सुंदर बनाना चाहता हूँ। मैं चाहता हूं कि मेरा घर इतना खूबसूरत हो कि दूसरे मेरे घर में आकर खुद रहना चाहें। आप चाहते हैं कि अपने घर की कमजोर दीवारों को दुरुस्त न किया जाए। अपने घर को ढहने दिया जाए। अपने घर से प्रेम न किया जाए। अपने घर को सुंदर बनाने में ऊर्जा न लगाई जाए। बल्कि दूसरे के घरों की बुराई की जाए। झगड़ा किया जाए। नफरत की जाए। हिंसा की जाए और ऐसा करने को जस्टिफाई करने के लिए तर्क और कारण गढ़े व प्रायोजित कियें जाएं। मैं बिलकुल समझ नहीं पाता कि जब खुद मेरे अपने घर की दीवारें खोखली व सड़ी हुई हैं,तो मैं अपने घर को ठीक करने की बजाए पड़ोसी के घर को ढहाने में अपनी ऊर्जा लगाऊं। मुझे यह मूर्खता की बात लगती है।
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मैं केवल हिंदू धर्म की कुरीतियों की बात करता हूं,इसका यह मतलब बिलकुल नहीं कि दूसरे धर्मों में कुरीतियाँ नहीं हैं,उन धर्मों में भी कुरीतियाँ हैं बिलकुल हैं और खूब कुरीतियाँ हैं। लेकिन मैं एक बात जानता हूं कि मैं यदि दूसरे धर्मों को गालियाँ दूंगा तो न मेरे धर्म की कुरीतियाँ खतम होगीं और न ही दूसरे धर्मों की।उल्टे मेरा ही और अधिक पतन हो जाएगा,मेरे और अधिक पतित होने से मेरा धर्म भी और पतित होगाऔर धर्म के इस पतन में मेरा योगदान होगाजो कि मैं बिलकुल नहीं चाहता। राजनैतिक सत्ताओं से धर्म बनते बिगड़ते होते तोकई सौ सालों की मुगलों व अंग्रेज़ों की गुलामी के बाद हिंदू धर्म खतम हो गया होता।अकबर का दीन ए ईलाही धर्म भारत का एकमात्र धर्म होता।
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| साईं बाबा और हनुमान का वह विवादित कार्टून जो शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद ने जारी किया था। |

