- उमाशंकर सिंह
हिंदुओं का पलायन पुरानी समस्या है। यह आरएसएस के बनने से पहले से है और इनके बनने के 91 साल बाद और केंद्र में करीब 16-17 और विभिन्न राज्यों में 25-30 साल सरकार में रहने के बाद भी बदस्तूर जारी है। एक हिंदू के पलायन की कहानी मैं सुनाता हूं आपको।
बिहार के सहरसा जिले से उस हिंदु युवा ने आज से करीब 17 साल पहले पलायन करके पहले भोलेनाथ की नगरी बनारस में तीन साल तक पनाह पाई थी। उसके बाद पांडवों के वक्त में भारतवर्ष की राजधानी रहे इंद्रप्रस्थ अर्थात दिल्ली पहुंच गया। दस साल इंद्रप्रस्थ में गुजारने के बाद उस हिंदू युवा को वहां से भी पलायन करना पड़ा। आजकल वह मुंबई में है। उसका नाम बताऊं या आप समझ गए?? खैर बता देता हूं।
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उस पलायित हिंदू का नाम उमाशंकर सिंह है। उसके कोसी इलाके से हिंदुओं के पलायन की समस्या बहुत पुरानी है। पहले वे लोग कलकत्ता पलायन करते थे। इसकी छाप उस कोसी इलाके के गीतों-कहावतों तक में है। उस इलाके का मशहूर लोकगीत है 'लागा झुलनिया का धक्का, बलम कलकत्ता निकल गए' है। वैसे उस कोसी इलाके में भी दूसरी जगहों से पलायन करके बहुत से लोग आए हुए थे। उनमें से ज्यादा आज हिंदुओं से ज्यादा हिंदू क्लेम करने वाले जैन मारवाड़ी थे।
बात चली तो बताता चलूं देश की मुख्य सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह जी भी जैन ही हैं। तो कोसी इलाके से सारे मारवाड़ी 90-95 के वक्त सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, फारबिसगंज से भाग गए। कारण अपराध की समस्या थी। रंगदारी की समस्या थी। उनसे रंगदारी वसूलने वालों में तीन बड़े नाम थे। एक थे राजपूत जाति के गौरव- आनंद मोहन। दूसरे थे यादव जाति के लाल- पप्पू यादव और तीसरे थे इन दोनों से थोड़ा बाद उभरे ब्राह्मणों-भूमिहारों के नायक- पप्पू देव।
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पिछले साल हुए बिहार चुनाव में अमित शाह जब इन इलाकों में चुनाव प्रचार करने और वोट मांगने गए तो इनने यहां से पलायन कर गए हिंदू-जैन मारवाड़ी व्यापारियों के पलायन के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा। आनंद मोहन जेल में हैं लेकिन उनकी पत्नी बीजेपी के टिकट से ही चुनाव लड़ीं और खेत रहीं। पप्पू यादव ने एक अपना दल बनाया था और वे हेलीकॉप्टर पर धुआंधार प्रचार करते थे।
लोगों का कहना था पप्पू यादव के हेलीकॉप्टर में पेट्रोल मारवाड़ी जाति के वही अमित शाह भरवाते थे, जिस जाति के बहुत सारे लोग पप्पू यादव के कारण पलायन किए थे। तीसरे गुंडे रत्न बचे पप्पू देव जी। उनके बारे में कहा जाता है कि नेपाल के किसी जेल में बंद हैं। इसलिए पिछले बिहार चुनाव में वे अमित शाह जी के कोई काम नहीं आ सके। मैं भी ना! हिंदुओं के पलायन की कहानी सुनाते-सुनाते आपको क्या सब सुनाने लग गया!! हट!!
हिंदुओं का पलायन पुरानी समस्या है। यह आरएसएस के बनने से पहले से है और इनके बनने के 91 साल बाद और केंद्र में करीब 16-17 और विभिन्न राज्यों में 25-30 साल सरकार में रहने के बाद भी बदस्तूर जारी है। एक हिंदू के पलायन की कहानी मैं सुनाता हूं आपको।
बिहार के सहरसा जिले से उस हिंदु युवा ने आज से करीब 17 साल पहले पलायन करके पहले भोलेनाथ की नगरी बनारस में तीन साल तक पनाह पाई थी। उसके बाद पांडवों के वक्त में भारतवर्ष की राजधानी रहे इंद्रप्रस्थ अर्थात दिल्ली पहुंच गया। दस साल इंद्रप्रस्थ में गुजारने के बाद उस हिंदू युवा को वहां से भी पलायन करना पड़ा। आजकल वह मुंबई में है। उसका नाम बताऊं या आप समझ गए?? खैर बता देता हूं।इसी विषय पर पढ़ें...
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