- अमीष श्रीवास्तव
2002-03 में जब सहारा समय राष्ट्रीय चैनल बन रहा था तो चैनलहेड और एडिटर अरुप घोष ने एंकर्स सेलेक्ट करने के लिए एक वर्कशाप लगाई ! शायद 3 दिन चली थी । हर एंकर को पहले टेलीप्रॉम्पटर पर ख़बर पढ़नी होती थी और फिर पलट कर बग़ल में बैठे गेस्ट का इंटरव्यू करना होता था ! उस समय इंटरव्यू के लिए सबसे मुश्किल गेस्ट थे नरेन्द्र मोदी । रिपोर्टर्स को खौफ था उनका । लिहाज़ा सभी को नरेन्द्र मोदी का इन्टरव्यू करना था ! सबके लिए नरेन्द्र मोदी बने ख़ुद अरुप घोष। कुछ भी पूछो ! अरूप घोष ने नरेंद्र मोदी की भूमिका इतनी गज़ब निभाई कि मुझे याद है अधिकतर एंकर्स 30 सेकंड या एक दो मिनट से ज़्यादा सवाल नहीं पूछ पाते थे ! किसी भी सवाल का अरूप घोष लगभग उसी तरीके से जवाब देते जैसा उस वक़्त नरेंद्र मोदी दे रहे थे। मोदी बने अरूप से इंटरव्यू करने वालों में और जल्दी धराशायी होने वालों में मैं भी था ।
कहना ये चाहता हूँ कि ' मोदी - अर्नब ' इन्टरव्यू में, मैं या कोई भी ये नहीं सोच रहा कि अर्नब चिल्लाए क्यों नहीं ? शालीनता से बात क्यों की या हेडलाइन क्यों नहीं निकाल पाये ? बल्कि ये कि जो नरेंद्र मोदी किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए मशहूर हैं, जो मीडिया के सामने धाकड़ हैं, जो किसी भी कड़े से कड़े जर्नलिस्ट के किसी भी सवाल पर छक्का जड़ सकते हैं, उनके सामने इस तरह लल्लो चप्पों टाइप बातचीत से अच्छा उन्ही वाक्यों को सवाल के रूप में रक्खा जाता ! कुछ ऐसे सवाल भी रखे जाते जिनका जवाब ज़रूरी है । वो दे देते और ग़ज़ब देते !
धोनी अच्छा खेल रहे हैं या नहीं, ये परखने के लिए बॉल उन्ही को तो नही थमा देंगे न कि ख़ुद उछालें और ख़ुद मारें ताकि वो कम्फ़्टर्बल तरीक़े से छक्के लगाएँ और हम तालियाँ बजाएँ? यकीन मानिये उन बॉल्स पर लगे छक्कों में भी मज़ा नहीं आएगा और आप कहें कि संतुष्ट हुए कि नहीं? ऐसे में धोनी का कोई अंधभक्त ही होगा जो ये निष्कर्ष निकालेगा कि वाह बन्दा गज़ब खेलता है !
सवाल अर्नब की इज़्ज़त से ज़्यादा नरेंद्र मोदी की इज़्ज़त का भी है? लप्पा बॉल से उनके जवाब देने का धारपन और हुनर भी कहाँ पता चलेगा ? लग रहा था अर्नब नरेंद्र मोदी नहीं मनमोहन सिंह से बात कर रहे हों ! ऐसी संगत और पेशकश हुनरमन्द को भी कमज़ोर बना देती है । इसीलिए इस इन्टरव्यू के बाद रतनजीत सिंह जैसे कई मित्रों को मोदी कमजोर होते ही दिखे ! बाकी आप चाहते हैं तो लिख देता हूँ ! बहुत बढ़िया शो था !

