-आशुतोष तिवारी
प्रिय नरेंद्र मोदी जी!
मुझे आपके हालिया भाषण सुनकर आपकी फिक्र हो रही है. लगता है, जैसे आप अपना काफी समय सरकार चलाने की बजाय व्हाट्स एप चलाने में बिता रहे हैं. यह संयोग नही है. आप आज कल सचमुच बहुत गए गुजरे भाषण देने लगे हैं. मनमोहन सिंह और अय्यर पर आपने जो आरोप जिस भाषा मे लगाए हैं, उनकी ड्राफ्टिंग व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के उसी गिरोह के लोग कर सकते हैं, जिनकी शिक्षा दीक्षा अमित मालवीय के सानिध्य में हो रही है.
मुझे शुरुआत से ही आपकी भाषा के स्तर के जहीन होने पर शक था. बहुत बोलने वाला आदमी ही कई बार बेहद घटिया बातें कर जाता है. आखिरी के 11 दिनों में गुजरात मे अपना भाषण देखिए. पकिस्तान, खिलजी, औरंगजेब, गुजराती अस्मिता सब आ गए हैं, नहीं आया तो बस आपका जग विख्यात गुजरात मॉडल.
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अरे भाई. पाकिस्तान से इतनी ही नफरत है तो क्या नवाज शरीफ को शपथ ग्रहण में आपने दरी बिछाने के लिए बुलाया था? मनमोहन सिंह तो दस साल में एक भी बार पाकिस्तान नहीं गए. आप अचानक से क्या वहां मजार पर चादर चढ़ाने के लिए गए थे. पाकिस्तान गुजरात चुनाव में दखल कर रहा है तो क्या आपको जनता ने यह सूचना देने के लिए चुना है. पाकिस्तान भी कह रहा है, अपने दम पर चुनाव जीतिए, पड़ोसी बेचारा आपकी कब तक मदद करे.
समझता हूं. आप स्वभाव से भावुक हैं. भाव में बह कर कुछ भी बोल जाते हैं. पर ऐसा तो न बोलिये कि आपकी एक बात दूसरी बात की ठीक उलट हो. आपने बोला था, 'मेरा क्या है, झोला उठा कर चल दूंगा'. अब कहते हैं कि : आपने मुझे छोड़ दिया तो मैं कहाँ जाऊंगा. मैं इसका जवाब कहाँ से लाऊं साहब. मुझे लगा कि जब आपने झोला उठा कर चल देने वाली बात कही थी तो ये भी सोच लिया होगा कि 'कहां जाएंगे.'
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खैर ! थोड़ा सा तो पद का लिहाज कीजिये. जिस नेता के मजे ले ले कर आप प्रधानमंत्री बने हैं, उसी नेता को तो अपने मजे लेने मत दीजिये. मुझे अच्छा नहीं लगता. अब जैसे भी हैं, हैं तो हमारे प्रधानमंत्री ही न !
