-सत्येंद्र सिद्धार्थ
मेरी प्यारी बिटिया,
आज मेरे मन में उठने वाले हर भाव को, एहसास को एवं अपार ख़ुशी को अपने सार्थक शब्दों में पिरोकर उन्हें नया आयाम देना चाहता हूँ. बिटिया, भावनाओं का यह प्रथम सफर तुम्हारे साथ मैं एक ख़त के माध्यम से तय करना चाहता हूँ. वास्तविकता तो यह है कि मै आज भीग रहा हूं सुखद अहसासों की नन्हीं बूंदों की बौछारों से. ऐसा इसलिए कि आज से ठीक सवा महीने पहले ईश्वर ने वरदान स्वरूप श्रवण नक्षत्र में तुम्हें मेरी गोद में रख दिया और मैं पिता बना. तुम्हारे चंचल नैनों को देख मैं अपने भाग्य पर इठलाया और तुमने पिता बनने का गर्व देकर जीवन पुलकित कर दिया.
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तुम्हारी मां कह रही थी कि दर्द का अहसास, वो सुई सी चुभन, जख़्म सब एक पल में काफूर हो गए, जब तुम्हारा पहला गर्म, नरम एवं नाजुक स्पर्श मिला. एक संतति के रूप में मिली तुम मेरे जीवन के सबसे ख़ूबसूरत नजरानों में से एक हो. सच कहूं तो तुम्हारे आने के बाद मेरे जीवन से अल्हड़पन समाप्त हो गया है और मुझे जिंदगी जीने का एक अर्थपूर्ण बहाना मिल गया है. मुझे लगने लगा है कि मेरे जीवन के सूने आंगन में तेरी पायल की झंकार पिता होने का मान, अभिमान और मेरी पहचान बढ़ाएगा. अब तुम मेरी प्रेरणा बन चुकी हो, जब तुम मुस्कुराती हो तो नई ऊर्जा मिलती है. जब तुम खिलखिलाकर मुझे स्पर्श करती हो तो मेरा रोम-रोम स्पंदन करने लगता है. मैं शुक्रगुजार हूँ तुम्हारा, मेरे जीवन में नूतन एहसास नव कोपल के रूप में भरने के लिए. मेरे जीवन में नया आयाम जोड़ने के लिए.
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आज मै तुम्हे क्या दूं, तुम मेरा ही अंश हो, मेरा सब कुछ तुम्हे समर्पित है. तुम फलो फूलो, अमरबेल सी बढ़ती जाओ. मैं अपना सारा लाड़- प्यार तुम पर लुटाऊं, तुम संस्कारी बनो यही दुआ मांगता हूं. तुम्हारे जीवन में इज़्ज़त, प्यार और अपनेपन की कभी कमी न आये, तुम अपने जीवन में नित नए आयाम का कीर्तिमान खड़ा करो, यही आकंक्षा है हमारी.
शुभकामनाओं सहित,
तुम्हारे पिता
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