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प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू के नाम एक ख़त, काश आपने कानून की जगह एंटायर पॉलिटिकल साइंस पढ़ी होती !

स्व श्री नेहरू जी,

आशा है आप कुशल मंगल होंगे और वहां की जिंदगी का लुत्फ उठा रहे होंगे। आप किस्मत वाले थे कि आपके पिताजी ने आपको उच्च शिक्षा दिलवाई। लेकिन हम देशवासियों को आपसे शिकायत भी है। ढेर सारी शिकायत। 

पहली शिकायत की आप की इतनी सारी पढ़ाई ने देश को क्या दिया ? आईआईटी, आईआईएम, रेल, डाक, खेती की अच्छी उपज, विज्ञान की तरक्की, संविधान बस? क्या करें इनका? काश आपको देश के लोगों की नब्ज़ पता होती। काश आप उतने ही दूरदृष्टी वाले होते जितने हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री जी हैं। 

जब आप यह सब बनवा रहे थे तो आपसे भी ज्यादा पढ़े लिखे देशवासी दिल में मन्दिर की उम्मीद लिए बैठे थे। मन्दिर भी साधारण नहीं येन केन प्रकारेन वाला। मतलब दूसरे के धर्मस्थल को छीन कर बनाया जाने वाला। इससे ही उनको परम संतुष्टि मिलनी थी। वर्तमान वाले ने दे दी वह संतुष्टि। अब सब खुश हैं देश में। आप आकर देखिए, दूध की नदियां बह रही है। रोजगार तो इतना है कि एक राज्य में 6 मृत व्यक्तियों को भी मिल गया!!!

एक किस्सा सुनते हैं कि चांदनी चौक इलाके में दंगा हुआ तो आप खुली जीप में बैठकर दंगास्थल पर पहुंच गए और दंगे को शांत करवाया। पता नहीं सही है कि गलत। यही तो इस देश को लोगों को नहीं पसंद। हमारा देश पसंद करता है वह आदमी जो मगरमच्छ के साथ कबड्डी खेलता हो। हमारा देश चाहता है कि भले देश के गरीब को सूखी रोटी भी नसीब न हो लेकिन प्रधानमंत्री को काजू की रोटी और मशरूम की सब्जी खानी चाहिए। वर्तमान वाले ने एक #मास्टरस्ट्रोक में अपने लिए पीएम हाउस से संसद तक के लिए एक गुफा बनवा ली है। उसी से आया जाया करेंगे। आप फालतू में बहादुरी दिखा रहे थे। यह वाले 56 इंच छाती वाले हैं। 

काश कि आपने कानून की जगह एंटायर पॉलिटिकल साइंस पढ़ी होती। तब आपको मालूम चलता की देश की तरक्की होती है दंगों से, झूठे वादों से, जुमलों से, हिन्दू मुस्लिम की रट लगाने से और मीडिया को कंट्रोल करने से। यह सब करते तो आज आप शायद जिंदा भी होते, एक बड़ी सी भक्त मण्डली के साथ। भक्त नहीं जानते ? अरे वही गली के नुक्कड़ का अफीमची!! बहुत काबिल निकला वह तो। गांजे की एक फूंक के बाद ही 20 गाली देता है आपको और इसके उसे पैसे भी मिलते हैं। 

मेरी सलाह मानिए। अगला जन्म किसी और देश में लीजिएगा। शायद वहां थोड़ी इज्जत मिल जाए। यहां तो आपकी मौत के लगभग 55 साल बाद भी हर गलती का जिम्मेदार आपको ही माना जाता है। 

आपका देशवासी

-राजीव श्रीवास्तव

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