मितरों, साल भर पहले, जब बाबा रामदेव के आश्रम से हथियार मिले थे...तो जब पक्षिराज गरुण के मन में शंका हुई कि बाबा रामदेव के आश्रम में आयुर्वेद के कच्चे माल और योग की मुद्राओं के चित्र के सिवा भारी मात्रा में हथियार क्यों बरामद हुए तो उस शंका का निवारण करने की ठानी। गिरते पड़ते भगवन शिव के पास कैलाश पर्वत पहुंचे। शिव जी किसी कलीग की बेटी की शादी में 101 का व्यवहार लिखाने निकल रहे थे इसलिए जल्दी में थे। लेकिन माँ पारवती को स्कूटर पर बैठने का इशारा कर एक कार्ड गरुण की हथेली से चिपका दिया।
गरुण प्रभु को माथ नवा कर गंतव्य की ओर बढ़ चले। उनकी नेक्स्ट लोकेशन थी कागभुशुंड का आश्रम। वहां पहुँच कर बैठे ही थे और पसीना पोंछ रहे थे। पक्षिश्रेष्ठ कागभुशुंड ने कूलर को देखा तो उसका घुमाने वाला नॉब टूटा हुआ था। अंदर से प्लास लाये और शेष बची घुंडी से पकड़ कर कूलर को फुल पे किया और आने का कारण पूछा।
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गरुण ने पूरी कथा एक साँस में कह सुनाई कि "ऐसी ऐसी बात है"
कागभुशुंड ने फ्रिज से बॉटल निकाल कर एक घूँट पानी पिया और बोलना शुरू किया।
सुनो पक्षिराज गरुण! यह सब प्रारब्ध की कर्म कमाई है। सबहिं नचावत राम गुसाईं। यह तो प्रभु की लीला है जिसका प्लाट सदियों पहले लिख लिया गया था। देवाधिदेव महादेव होते तो कहानी नमक मिर्च लगा के सुनाते लेकिन मैं सीधे प्वाइंट पर आता हूँ।
वह शेर तो तुमने सुना होगा "जब जब होय धरम कै हानी"। भगवान् ने इस बार धरती पर पाप मिटाने के लिए जो अवतार ग्रहण किया है वह जानते ही हो। न जानते हो तो हर सन्डे सुबह 11 बजे रेडियो खोल लिया करो। फिर भी समझ न आये तो चुल्लू भर पानी में डूब मरो।
तो जिस प्रकार त्रेता युग में प्रभु ने श्री राम के गेटअप में रावण का संहार करने के लिए विभीषण को अपनी तरफ मिला लिया था उसी प्रकार इस युग में भी कुछ कुटिल बाबाओं, हिस्ट्री शीटरों, चार सौ बीसों, सेठों, पंडों और तड़ीपारों को काम से लगा दिया है। यह सभी भगवत्प्रेमी भक्त दरअसल डबल रोल में हैं। एक रोल में तो अपने परिवार का भला कर रहे हैं और दूसरे में प्रभु की लीला में शामिल होकर देश बचा रहे हैं। कुल मिला कर देश को आगे ले जाने और पाप का सर्वनाश करने की टीम है ये। अब इसमें इन्हें साम दाम दंड भेद का यूज तो करना ही होगा। अलबत्ता बाबा के घर से हथियार न मिलते तो आश्चर्य होता कि प्रभु यह मानवता की लड़ाई बिना समुचित हथियारों के कैसे लड़ेंगे।
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मेरा देश वाकई बदल रहा है, हम अंदर से हिंसक और पैशाचिक हो रहे हैं, बाहर से सभ्य और धार्मिक !
तो इंद्र ने त्रेता युग में तो अपना रथ देकर रावण का इनकाउंटर करा दिया था क्योंकि उसका अपना भी गेम प्लान था, लेकिन अब वह मोटा हो गया है। प्रभु को ज्यादा लिफ्ट नहीं देता। इसलिए प्रभु ने पूरा का पूरा चार्ज अपने हाथ में ले रखा है।
आशा करता हूँ कि आपकी शंका का निवारण मैंने कर दिया है। अब मेरे ऑफिस का समय हो रहा है, अतः आप प्रस्थान करें। आइये आपको टैक्सी स्टैंड तक छोड़ देता हूँ।
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