'प्रिय कंगना,
आपकी फिल्म 'क्वीन' को मिली कामयाबी से काफी पहले से मैंने हमेशा निजी और सार्वजनिक रूप से आपकी तारीफ़ की है, लेकिन अब बार-बार अपनी पर्सनल और लव लाइफ के बारे में चर्चा करना आपकी फिल्म की रिलीज़ से पहले के पीआर कैंपेन जैसा लग रहा है। आपकी सफलता को ऐसी सनसनीखेज चर्चाओं की जरूरत नहीं है। आपने पहले भी कई बड़े मुद्दों पर अपने विचार ओपन लेटर्स और इंटरव्यू के जरिये बेबाकी से रखे हैं, जिसका मैं स्वागत करती हूं, लेकिन अभी जो कुछ चल रहा है वह सिर्फ एक 'सर्कस' जैसा है।
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कंगना के नाम एक ख़त, हम सबके लिए तुम रियल में रानी हो
यह सिर्फ एक कामकाजी महिला के लिए दूसरी कामकाजी महिला के बारे में राय है। इसे मैं अपनी पूरी सोच-समझ से लिख रही हूं और इसके लिए मुझे की पीआर एजेंसी के निर्देश नहीं मिल रहे। मेरा मानना है कि पुरुषों के बीच भी बड़ी संख्या में लोग नारीवादी हैं और ऐसे लोग मेरे और आपकी जैसी कामकाजी महिलाओं की बेबाकी की तारीफ़ करते हैं। हमें उनकी जरूरत नहीं है, लेकिन हमें उन्हें भूलना भी नहीं चाहिए। हमारे आसपास ऐसी हजारों महिलाएं हैं, जो रोजाना अपने सम्मान के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। लेकिन आपकी इस हरकत की वजह से नारीवाद को बड़ा धक्का लगा है।
मै समझ सकती हूं कि बहुत सारी कठिनाइओं को पार करके आप इस मुकाम पे पहुंची हैं. लेकिन अगर आप इस मुकाम से सकारात्मक बदलाव लाती हैं तो बेहतर होगा. जीवन में हमें जो कुछ भी मिलता है वो स्थिर नहीं है. यह प्रकृति का नियम है कि जो आज है कल वो बदल जाएगा। एक राजा को भी अपने पद से कभी न कभी हटना पड़ता है।
ओणम की शुभकामनाएं
सोना महापात्रा
आपकी फिल्म 'क्वीन' को मिली कामयाबी से काफी पहले से मैंने हमेशा निजी और सार्वजनिक रूप से आपकी तारीफ़ की है, लेकिन अब बार-बार अपनी पर्सनल और लव लाइफ के बारे में चर्चा करना आपकी फिल्म की रिलीज़ से पहले के पीआर कैंपेन जैसा लग रहा है। आपकी सफलता को ऐसी सनसनीखेज चर्चाओं की जरूरत नहीं है। आपने पहले भी कई बड़े मुद्दों पर अपने विचार ओपन लेटर्स और इंटरव्यू के जरिये बेबाकी से रखे हैं, जिसका मैं स्वागत करती हूं, लेकिन अभी जो कुछ चल रहा है वह सिर्फ एक 'सर्कस' जैसा है।
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यह सिर्फ एक कामकाजी महिला के लिए दूसरी कामकाजी महिला के बारे में राय है। इसे मैं अपनी पूरी सोच-समझ से लिख रही हूं और इसके लिए मुझे की पीआर एजेंसी के निर्देश नहीं मिल रहे। मेरा मानना है कि पुरुषों के बीच भी बड़ी संख्या में लोग नारीवादी हैं और ऐसे लोग मेरे और आपकी जैसी कामकाजी महिलाओं की बेबाकी की तारीफ़ करते हैं। हमें उनकी जरूरत नहीं है, लेकिन हमें उन्हें भूलना भी नहीं चाहिए। हमारे आसपास ऐसी हजारों महिलाएं हैं, जो रोजाना अपने सम्मान के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। लेकिन आपकी इस हरकत की वजह से नारीवाद को बड़ा धक्का लगा है।
मै समझ सकती हूं कि बहुत सारी कठिनाइओं को पार करके आप इस मुकाम पे पहुंची हैं. लेकिन अगर आप इस मुकाम से सकारात्मक बदलाव लाती हैं तो बेहतर होगा. जीवन में हमें जो कुछ भी मिलता है वो स्थिर नहीं है. यह प्रकृति का नियम है कि जो आज है कल वो बदल जाएगा। एक राजा को भी अपने पद से कभी न कभी हटना पड़ता है।
ओणम की शुभकामनाएं
सोना महापात्रा