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दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष को लिखी अन्ना हजारे की इस जवाबी चिट्ठी ने करवा दी बीजेपी की जबरदस्त फजीहत, पढ़ें पूरा पत्र



दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को एक चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठी में आदेश गुप्ता ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी के खिलाफ दिल्ली आकर एक विरोध प्रदर्शन करने का अनुरोध किया था। अन्ना हजारे ने इस चिट्ठी के जवाब में क्या लिखा है, पढ़िए पूरी चिट्ठी-

महोदय,
24 अगस्त को लिखा आपका पत्र मीडिया के माध्यम से मुझे प्राप्त हुआ। आपने पत्र में लिखा है कि दिल्ली आकर आम आदमी पार्टी के विरोध में लोकपाल आंदोलन जैसा आंदोलन कर आवाज उठाएं और आपका साथ दें।

आपका प्रेस को लिखा पत्र पढ़कर मुझे अफसोस हुआ। आपकी बीजेपी पिछले छह साल से ज्यादा वक्त से देश की सत्ता संभाल रही है। आपकी पार्टी में बड़ी संख्या में युवक होते हुए और विश्व में सबसे ज्यादा पार्टी सदस्य होने का दावा करने वाली पार्टी के नेता मंदिर में 10 बाय 12 फीट के कमरे में रहने वाले 83 साल के अन्ना हजारे जैसे फकीर आदमी को, जिसके पास धन-दौलत और सत्ता नहीं है, उसे को दिल्ली में आंदोलन करने के लिए बुला रहे हैं। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण बात और क्या हो सकती है?

आज केंद्र में आपकी सरकार है। दिल्ली सरकार के भी कई विषय केंद्र सरकार के अंतर्गत हैं। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए कठोर कदम केंद्र सरकार ने उठाए, ऐसा दावा हमेशा प्रधानमंत्री करते हैं। अगर ऐसा है और अगर दिल्ली सरकार ने भ्रष्टाचार किया है तो क्यों उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई आपकी ही सरकार नहीं करती? या भ्रष्टाचार निर्मूलन के केंद्र सरकार के सब दावे खोखले हैं?

मैंने 83 साल की उम्र में समाज, राज्य और राष्ट्र की भलाई के लिए 22 साल से अहिंसा के मार्ग से अलग अलग आंदोलन किए है। 20 बार मैंने अनशन किए है। हमारे आंदोलन से अब तक छह मंत्री पद से हटाए गये हैं। उनमें हर पक्ष-पार्टी के मंत्री है। मैंने किसी पक्ष और पार्टी को देखते हुए आंदोलन नहीं किया है। हमारा पक्ष और पार्टी से कोई लेन-देन नहीं है। सिर्फ गांव, समाज और देश की भलाई सोचकर आंदोलन करता आया हूं।



सत्ता में रहने वाली पर गुमराह हुई जिस पार्टी के विरोध में मेरा आंदोलन हुआ उस पार्टी ने मुझे दूसरी पार्टी के साथ जोड़ा। रेडीमेड कपड़े की दुकान होती है। उसमें सिलाई किए हुए कपड़े किसी के बदन का नाप लेकर नहीं सिले जाते। लेकिन वह कपड़े किसी न किसी के बदन पर सही आते हैं। उनको लगता है की यह कपड़े हमारे लिए ही सिले गये हैं। आज कई पक्ष और पार्टियों का वैसा ही हुआ है। जिस पार्टी का हमारे आंदोलन से नुकसान होता है, वह मेरे बारे में, मैं दूसरी पार्टी का हस्तक हूं ऐसी समाज में गलतफहमी फैलाते हैं। आज तक कई बार मेरी निंदा करने का प्रयास हुआ है, लेकिन अन्ना हजारे को कोई फर्क नहीं पड़ा है। अन्ना हजारे वही रहा है।

2011 में जब लोग भ्रष्टाचार से तंग आ गए थे और जब मैंने आंदोलन किया और इसके समर्थन में दिल्ली और देश की जनता सड़क पर उतर आई थी। इसके बाद 2014 में आपकी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना दिखाकर सत्ता में आई, लेकिन जनता की परेशानी में कोई कमी नहीं हुई। एक पक्ष को सिर्फ दूसरे पक्ष की पार्टी के दोष दिखते हैं, मगर कभी खुद में भी झांककर देखना चाहिए और खामियों के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए।

वर्तमान हालात में देश की कोई भी पार्टी देश को उज्जवल भविष्य दे पाएगी, ऐसा मुझे नहीं लगता। सत्ता से पैसा और पैसों से सत्ता, इस चक्र में बहुत-सी पार्टियां लगी हुई हैं। सत्ता कोई भी पक्ष या पार्टी की क्यों न हो, जब तक व्यवस्था नहीं बदलेगी, तब तक लोगों को राहत नहीं मिलेगी। इसलिए मेरे फिर दिल्ली में आने से कोई फर्क नहीं आयेगा ऐसी मेरी धारणा है।

देश में बदलाव सिर्फ पार्टी को बदल देने से नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन से आयेगा। सिर्फ हंगामा खड़ा करना हमारा मकसद नहीं, हमारी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिये।

भवदीय

कि. बा. तथा अन्ना हजारे
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